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श्रावण पुत्रदा एकादशी का महत्व

By August 4, 2022 Blog

हिंदू धर्म में, एक वर्ष में 24 एकादशी व्रत रखे जाते हैं। सभी चौबीस एकादशी में श्रावण पुत्रदा एकादशी का विशेष महत्व है, ऐसा माना जाता है कि यदि कोई निःसंतान दंपत्ति पूरे विधि विधान से इस व्रत का पालन करता है तो उसे संतान सुख की प्राप्ति अवश्य होती है। इसके अलावा इस व्रत को रखने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। भगवान विष्णु की कृपा से व्यक्ति की आर्थिक समस्या दूर होती है और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है। सावन माह में पड़ने के कारण इस एकादशी का महत्व और अधिक इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि श्रावण पुत्रदा एकादशी के व्रत और पूजन से भगवान विष्णु के साथ ही भोलेनाथ की कृपा भी प्राप्त होती है।

श्रावण पुत्रदा एकादशी पूजा विधि

इस दिन निर्जला व्रत रखना उत्तम माना जाता है। श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत के दिन एक बूंद भी पानी नहीं पीना चाहिए। हालांकि निर्जला व्रत यदि संभव न हो तो फलाहारी भी रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन एकादशी का व्रत करने के बाद अगर व्यक्ति श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत की कथा सुनता है तो उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।

विधि :

1. सबसे पहले दशमी तिथि से व्रत करना शुरू करें।

2. दशमी की शाम को हल्का और सात्विक भोजन करें।

3. प्रातः काल अथवा सूर्योदय से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

4. भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक या दीया जलाएं।

5. इस पूजा में तुलसी, मौसमी फल और तिल का प्रयोग करें।

6. फल, नैवेद्य अर्पित करें और अंत में आरती करें।

7. तुलसी विष्णु को बहुत प्रिय है, इसलिए उनकी पूजा में तुलसी का प्रयोग अवश्य करना चाहिए।

8. विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।

9. एकादशी की रात जागरण और भजन-कीर्तन करें।

10. शाम को श्रवण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा या कथा पढ़ें या सुनें।

11. शाम को पूजा के बाद यदि फलाहारी व्रत रखा है तो फल या जूस का सेवन कर सकते हैं, सात्विक भोजन करें।

12. व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य के नियमों का भी पालन करना चाहिए।

13. अगले दिन व्रत का पारण मुहूर्त पर ही करें, तभी व्रत का फल प्राप्त होत है। पारण के समय ब्राह्मणों को भोजन कराएं और यथासंभव दान-दक्षिणा जरूर दें।

14. उसके बाद भगवान का ध्यान करके अपनी गलतियों की क्षमा मांगकर व्रत का अंत करें।

श्रवण पुत्रदा एकादशी व्रत तिथि :

एकादशी प्रारंभ तिथि: 7 अगस्त 2022, सुबह 11:50 बजे

एकादशी समाप्त होने की तिथि : 8 अगस्त 2022 रात 09:00 बजे

श्रावण पोत्रदा एकादशी व्रत तिथि: 8 अगस्त, 2022

पारण दिन और समय: 9 अगस्त को – सुबह 05:47 से 08:27 बजे तक

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