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निर्जला एकादशी व्रत

By June 7, 2022 Blog

जय श्री राधे कृष्णा ! आपका हमारे चैनल में स्वागत है। अभी ज्येष्ठ महीना चल रहा है। और ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है। हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को सभी एकादशी तिथियों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस व्रत को रखने से सभी एकादशी के पुण्य की प्राप्ति होती है। सभी एकादशियों में से निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है। इस एकादशी के व्रत से व्यक्ति को वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस व्रत से मनुष्य को अक्षय पुण्य की प्राप्ति भी होती है।

इस बार द्वादशी तिथि का क्षय होने के कारण लोगों के बीच एकादशी तिथि को लेकर लोगों के बीच भम्र की स्थिति है कि आखिर निर्जला एकादशी व्रत 10 जून या फिर 11 जून, कब रखा जाएगा।

ये मैं आपको इस वीडियो में बताऊंगा। आइये पहले जानते हैं की निर्जला एकादशी के व्रत को कैसे करना चाहिए। इस व्रत के एक दिन पहले ही तामसिक भोजन, मांस – मदिरा को त्याग देना चाहिए। दसवीं तिथि में सात्विक भोजन करें। जिसमे पेय पदार्थ , पानी की अधिकता वाले फल और पानी का सेवन अधिक करें। क्योँकि इस व्रत में आप को जल ग्रहण नहीं करना है।

इस समय गर्मी अधिक पड़ रही है तो व्रत के दिन निर्जला रहने के लिए आप को मानसिक रूप से तैयार रखना होगा। यदि आप बीमार है और व्रत रखने के हालत में नहीं है तो इस व्रत को न रखे। क्योंकि भगवान ये नहीं कहते कि अपने शरीर को कष्ट दे कर व्रत करो. क्योँकि आत्मा को कष्ट दे कर आप परमात्मा को प्रसन्न नहीं कर सकते है।

साथ ही व्रत में आत्मसंयम और ब्रह्मचर्य का पालन करे। एकादशी के दिन दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही निर्जला एकादशी व्रत के दिन जल का दान करना उत्तम माना जाता है। प्यासे लोगो कको पानी पिलाए, अपने घर के आस पास खुले में या छत पर चिड़ियों के लिए दाना पानी रखे। इसके अलावा गरीब, जरूरतमंद ब्राह्मणों को अन्नदान, छाता दान, बिस्तर दान, वस्त्र दान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस दिन चाहें तो आप चने और गुड़ का भी दान कर सकते हैं। यह भी बहुत शुभ फलदायी होता है। इससे सूर्य देव का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन श्री विष्णु और लक्ष्मी जी का पूजन करे, तथा व्रत कथा अवश्य सुने, साथ ही श्रीसूक्त का पाठ भी करें, जिससे घर में सदा लक्ष्मी जी का वास रहेगा।

आइये जानते है की निर्जला एकादशी में क्या नहीं करना चाहिए?

शास्त्रों के अनुसार व्रत का संकल्प लेने के बाद अगले दिन सूर्योदय होने तक जल भी ग्रहण नहीं करें। इस एकादशी पर अन्न और फलाहार करने की भी मनाही होती है।

अपने घर आये किसी पयासे व्यक्ति को जल जरूर पिलाये हो सके तो भोजन भी कराये। अपने मन से द्रेष, क्रोध और घ्रणा को निकाल दे। काम, मोह, लालच अदि को त्याग दे। इसके अलावा सभी व्रतों की तरह इसमें भी पूर्ण सावधानी के साथ व्रत करें।

आइये अब जानते है निर्जला एकादशी का शुभ मुहूर्त:

वैदिक पंचांग के मुताबिक, निर्जला एकादशी तिथि शुक्रवार, 10 जून 2022 को सुबह 07 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर अगले दिन शनिवार, 11 जून 2022 को सुबह 05 बजकर 47 पर समाप्त होगी।

उदय तिथि के अनुसार निर्जला एकदशी का प्रारम्भ ११ जून को होगा। ऐसे में कई लोग ये व्रत 10 जून को रखेंगे और कई लोग 11 जून को रखेंगे।

आपको बताते हैं की ऐसा क्यों है?

जो लोग वैष्णो सम्रदाय से शिक्षा दीक्षा लेकर के वैष्णो मत का पालन करते है। और विष्णु जी को ही अपना परम आराध्य मानते हैं वे लोग द्रादशी से मिली हुई एकदशी लो ही व्रत रखते है। और जो साधारण जन होते है या गृहस्थ होते है वे एक दिन पहले एकादशी व्रत रखते है। इसलिए कई पंचांगों में निर्जला एकादशी व्रत 11 जून को बताया गया है। व कई में 10 जून को बताया गया है। अतः भ्रम की स्तिथि हो जाती है की किस दिन व्रत रखे।

तो मेरे अनुसार गहस्थ लोंगो को 10 जून को ही एकादशी व्रत करना चाहिए , इसका कारन ये है की द्वादशी तिथि 11 जून को सुबह 05:47 से लेकर 12 जून को सुबह 3:25 मिनट तक रहेगा। ऐसे में अगर निर्जला एकादशी का व्रत रखते है तो पारण द्वादशी तिथि के समाप्ति के बाद त्रयोदशी के दिन होगा। जबकि एकदशी तिथि का पारण द्वादशी तिथि के समाप्त होने से पहले और हरी वासर से पहले किया जाता है। ऐसे में पारण 11 जून को करना बेहतर होगा। जो लोग 10 जून को निर्जला एकादशी का व्रत रखेंगे उनके लिए 10 जून को-

सूर्योदय का समय : सुबह 05:22 मिनट

सूर्यास्त का समय : शाम 07:18 मिनट

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 03:47 से सुबह 04:35 तक

अभिजित मुहूर्त : सुबह 11:53 से दोपहर 12 : 48 तक रहेगा|

एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त 11 जून 2022 , को दोपहर 01:44 बजे से शाम 04 : 32 मिनट तक रहेगा।

इसी समय पर निर्जला एकादशी का पारण करना उत्तम रहेगा एकादशी पारण का समय सुबह न होकर दोपहर में है इसका कारण है कि 11 जून को समय हरी वासर का समय होगा और इस समय एकादशी व्रत पारण नहीं करते हैं , क्युकी द्वादशी के पहले एक चौथाई समय हरीवासर समय होता है।

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