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एकादशी के दिन चावल क्यों नहीं खाए जाते है?

By May 26, 2022 Blog

हिंदू धर्म में एकादशी एक महत्वपूर्ण व्रत है। एकादशी यानी ग्यारहवें दिन जो तिथी होती है वहीं एकादशी कहलाती है। हर महीने के दोनों पक्षों में एकादशी आती है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन श्रद्धालु विधि- विधान से भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करते हैं।
सनातन धर्म में जितने भी पर्व त्यौहार होते है उनके अलग अलग नियम होते है जिसमे तामसिक भोजन, शराब, मांस आदि वर्जित होते है। जिन्हें व्रत रखने वाले या श्रद्धालु मान्यताओं के आधार पर उन्हें मानते है। इसके अलावा मानसिक शुद्धता का भी होना आवश्यक है।
पुरानी मान्यताओं के अनुसार एकादशी में चावल खाना भी वर्जित है एकादशी के दिन लोग व्रत रखते हैं और इस दिन चावल का बिल्कुल भी सेवन नहीं करते हैं। ऐसी मान्यता है कि एकादशी के दिन चावल नहीं खाने चाहिए। ये एकादशी के व्रत के नियमों में शामिल होता है।

चावल क्यों नहीं खाना चाहिए?

एकादशी क दिन चावल न खाने के पीछे कई धार्मिक और वैज्ञानिक मान्यते है जो इस प्रकार है कि:

1. जो इस दिन चावल ग्रहण करता है उसका अगला जन्म रेंगने वाले जीव की योनि में होता है। विष्णु पुराण के अनुसार एकादशी पर चावल खाने से पुण्य फल नष्ट हो जाते है क्योंकि चावल को देवताओं का भोजन कहा गया है। इसलिए देवताओं के सम्मान में इस दिन चावल का सेवन नहीं करते हैं।

2. एक दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि मेधा ने माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए अपने शरीर का त्याग कर दिया था और धरती में समा गए थे। ये माना जाता है कि उस दिन एकादशी तिथि थी फिर महर्षि मेधा का जन्म जौ और चावल के रूप में हुआ था यही वजह है कि चावल और जौ को जीव माना जाता हैं इसलिए एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित होता है।

3. वैज्ञानिक तथ्यों के मुताबिक चावल में अधिकतम भाग जल का होता है। जल चंद्रमा से प्रभावित होता है। चन्द्रमा को चंचल माना गया है। चावल खाने से शरीर में जल की अधिकता होती है । इससे मन पर उसका प्रभाव होता है और मन एकाग्र होने की बजाय चंचलता की ओर अग्रसर होता है। मन के चंचल होने की स्थिति में पूजा पाठ, जप-तप और धार्मिक कार्यों में प्रभाव पड़ता है, व्रती एकाग्र नहीं हो पता। हर व्रत में मन की शुद्धि और एकाग्र होना आवश्यक है। यहीं वजह है कि एकादशी के दिन चावल का सेवन शास्त्रों में बिल्कुल वर्जित है।

आइये जानते है एकादशी के दिन और क्या नहीं खाना चाहिए?

मान्यताओं के अनुसार जौ, मसूर की दाल, बैंगन और सेमफली भी एकादशी तिथि पर खाना वर्जित होता है। इसलिए इन चीजों का भी ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा में मीठा पान चढ़ाया जाता है इसलिए इस दिन पान खाना भी वर्जित होता है। साथ ही एकादशी के दिन यदि आप व्रत नहीं भी रहते है फिर भी मांस, मदिरा, प्याज़, लहसुन जैसी तामसी चीजों से भी दूर रहना चाहिए। एकादशी के दिन सात्विक भोजन ग्रहण करते हुए भगवन विष्णु को याद करना चाहिए।
यदि आपके मन में एकादशी व्रत या दूसरे व्रतों को लेकर कोई प्रश्न है तो आप दिल्ली के सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषचार्य राम मेहर शर्मा जी से ऑनलाइन या कॉल पर संपर्क कर सकते है।

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