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अजा एकादशी व्रत,पूजा विधि और महत्व

By August 20, 2022 Blog

एकादशी भगवान विष्णु जी को अति प्रिय है इसलिए एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु और साथ में माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भादो मास में पड़ने वाली एकादशी तिथि को अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है। सभी व्रतों में एकादशी व्रत को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इसे अन्नदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

हिन्दू धार्मिक शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि जो भक्त विधि विधान से इस व्रत को करते हुए रात्रि जागरण करते हैं, उनके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और अंत में वे स्वर्गलोक को प्राप्त होते हैं। इसके अलावा अजा एकादशी की कथा को सुनने मात्र से भक्तजनों को अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है।

सिद्धि एवं त्रिपुष्कर योग में अजा एकादशी व्रत

उदया तिथि के मुताबिक अजा एकादशी का व्रत 22 अगस्त को रखा जाएगा। वर्ष 2022 में अजा एकादशी व्रत सिद्धि और त्रिपुष्कर योग में है। ये दोनों ही योग पूजा पाठ की दृष्टि से शुभ फलदायी हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष को अजा एकादशी तिथि 22 अगस्त 2022 को सुबह 03 बजकर 35 मिनट पर प्रारम्भ होगी और 23 अगस्त 2022 सुबह 06 बजकर 06 मिनट पर इसका समापन होगा। इस दिन भगवान विष्णु के ऋषिकेष स्वरूप की पूजा की जाती है।।

इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि अजा एकादशी का व्रत रखने से सभी प्रकार के पापों का नाश होता है।
• एकादशी के दिन प्रातः सूर्योदय से पूर्व स्नान करें।
• भगवान विष्णु की मूर्ति, प्रतिमा या उनके चित्र को स्थापित करना चाहिए।
• अब भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक जलाकर, प्रसाद, तुलसी जल, फल, नारियल, अगरबत्ती और फूल देवताओं को अर्पित करने चाहिए।
• भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा अर्चना करनी चाहिए। पूजा के बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करनी चाहिए। पूजा के दौरान मंत्रों का जाप करना चाहिए।
• एकादशी के दिन में निराहार एवं निर्जल व्रत का पालन करें।
• इस व्रत में रात्रि जागरण करें।
• अगली सुबह यानि द्वादशी तिथि के दिन इस दिन व्रती को सुबह उठकर स्नान करना चाहिए।
• द्वादशी पर पूजा के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं व दान-दक्षिणा दें।
• फिर स्वयं भोजन करें और अजा एकादशी व्रत का पारण करना चाहिए।

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