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By October 27, 2026 Blog

दिवाली लक्ष्मी कुबेर पूजा 2026: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, सामग्री और धार्मिक महत्व

दिवाली लक्ष्मी कुबेर पूजा 2026 रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। नई दिल्ली के लिए लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:54 बजे से 7:50 बजे तक बताया गया है। इस दौरान माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भगवान कुबेर की पूजा की जाती है।

दिवाली केवल घर सजाने, दीपक जलाने और मिठाइयाँ बाँटने का त्योहार नहीं है। हिंदू धर्म में यह पर्व सुख-समृद्धि, शुभता, कृतज्ञता और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भक्त माता लक्ष्मी से परिवार की खुशहाली और भगवान कुबेर से धन-संपत्ति के संरक्षण की प्रार्थना करते हैं।

लेकिन दिवाली लक्ष्मी कुबेर पूजा कैसे करें? पूजा में कौन-कौन सी सामग्री चाहिए? शुभ मुहूर्त क्या है और भगवान कुबेर की पूजा क्यों की जाती है? ऐसे सवाल बहुत से श्रद्धालुओं के मन में आते हैं।

इस लेख में आप दिवाली लक्ष्मी कुबेर पूजा 2026 की तिथि, दिल्ली का शुभ मुहूर्त, आवश्यक पूजा सामग्री, घर पर पूजा करने की विधि, मंत्र और धार्मिक महत्व विस्तार से जानेंगे।

दिवाली लक्ष्मी कुबेर पूजा 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार दिवाली पर लक्ष्मी पूजा कार्तिक अमावस्या के दिन प्रदोष काल में करने की परंपरा है। प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद का समय होता है, जिसे लक्ष्मी पूजन के लिए विशेष महत्व दिया जाता है।

नई दिल्ली के अनुसार पूजा का समय इस प्रकार है:

पूजा का विवरणतिथि और समय
दिवाली 2026रविवार, 8 नवंबर 2026
अमावस्या तिथि प्रारंभ8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे
लक्ष्मी पूजा शुभ मुहूर्तशाम 5:54 से 7:50 बजे तक
प्रदोष कालशाम 5:31 से 8:09 बजे तक
वृषभ कालशाम 5:54 से 7:50 बजे तक
स्थाननई दिल्ली, भारत

ध्यान दें: ये समय नई दिल्ली के लिए हैं। अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और पंचांग की गणना के अनुसार पूजा का मुहूर्त बदल सकता है। पूजा से पहले अपने शहर का स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।

लक्ष्मी पूजा में प्रदोष काल का क्या महत्व है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दिवाली की शाम प्रदोष काल में माता लक्ष्मी की पूजा करना शुभ माना जाता है।

कई पंचांग परंपराओं में प्रदोष काल के साथ वृषभ लग्न के संयोग को विशेष महत्व दिया जाता है। वृषभ को स्थिर लग्न माना जाता है, जिसका संबंध स्थिरता से जोड़ा जाता है।

इसी कारण श्रद्धालु इस अवधि में परिवार की सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिरता के लिए प्रार्थना करते हैं।

हालाँकि अमावस्या तिथि 9 नवंबर तक रहेगी, लेकिन नई दिल्ली में दिवाली लक्ष्मी पूजन 8 नवंबर 2026 को किया जाएगा।

लक्ष्मी कुबेर पूजा क्या है?

लक्ष्मी कुबेर पूजा एक धार्मिक अनुष्ठान है, जिसमें धन और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी तथा धन के संरक्षक माने जाने वाले भगवान कुबेर की आराधना की जाती है।

हिंदू धर्म में माता लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य और समृद्धि की देवी माना जाता है।

वहीं भगवान कुबेर को धन के देवता और देवताओं के कोषाध्यक्ष के रूप में जाना जाता है।

दोनों की संयुक्त पूजा का धार्मिक संदेश यह है कि धन अर्जित करने के साथ उसका उचित संरक्षण और सदुपयोग करना भी आवश्यक है।

दिवाली पर भगवान गणेश की पूजा भी की जाती है। उन्हें बुद्धि, शुभ आरंभ और विघ्नों को दूर करने वाला देवता माना जाता है।

हालाँकि लक्ष्मी-गणेश पूजा व्यापक रूप से प्रचलित है, लेकिन भगवान कुबेर को शामिल करने की परंपरा हर परिवार और क्षेत्र में एक जैसी नहीं होती।

दिवाली पर लक्ष्मी कुबेर पूजा क्यों की जाती है?

दिवाली का संबंध कई धार्मिक परंपराओं से है। इनमें भगवान श्रीराम का अयोध्या लौटना और कार्तिक अमावस्या पर माता लक्ष्मी की आराधना प्रमुख हैं।

इस दिन दीपक जलाना अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक माना जाता है।

लक्ष्मी कुबेर पूजा इस पर्व में समृद्धि और धन के सदुपयोग का भाव जोड़ती है।

1. सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना

श्रद्धालु माता लक्ष्मी से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना करते हैं।

यहाँ समृद्धि का अर्थ केवल धन प्राप्त करना नहीं है। इसमें पारिवारिक खुशहाली, स्थिर जीवन, रोजगार और अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की क्षमता भी शामिल हो सकती है।

2. धन के संरक्षण का महत्व

भगवान कुबेर को धन-संपत्ति का संरक्षक माना जाता है।

उनकी पूजा धन के प्रति जिम्मेदारी, बचत और संसाधनों के उचित उपयोग का प्रतीक मानी जाती है।

3. व्यापार और कार्यों में नई शुरुआत

कई व्यापारी समुदायों में दिवाली पर चोपड़ा पूजन की परंपरा है। इसमें बही-खातों और लेखा-पुस्तकों की पूजा की जाती है।

यह परंपरा व्यापार, आजीविका और ईमानदारी से कार्य करने के संकल्प से जुड़ी है।

4. पारिवारिक धार्मिक परंपराओं का पालन

दिवाली पर परिवार के सदस्य मिलकर घर सजाते हैं, दीपक जलाते हैं, प्रसाद तैयार करते हैं और आरती करते हैं।

इससे धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलता है।

ध्यान रखना चाहिए कि पूजा एक आस्था-आधारित धार्मिक अनुष्ठान है। इसे धन बढ़ने या आर्थिक समस्याएँ समाप्त होने की गारंटी नहीं समझना चाहिए।

दिवाली लक्ष्मी कुबेर पूजा 2026 की संपूर्ण सामग्री सूची

लक्ष्मी कुबेर पूजा सामग्री पहले से तैयार रखने से पूजा के दौरान बार-बार उठने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

सामान्य रूप से निम्नलिखित सामग्री का उपयोग किया जाता है:

  • माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान कुबेर की मूर्ति या तस्वीर
  • लकड़ी की चौकी
  • लाल या पीला साफ कपड़ा
  • कलश और स्वच्छ जल
  • आम के पत्ते और नारियल, यदि परिवार की परंपरा में उपयोग होते हों
  • कुमकुम, रोली, हल्दी और चंदन
  • अक्षत यानी बिना टूटे चावल
  • ताजे फूल और फूलों की माला
  • घी या तेल के दीपक और रुई की बाती
  • धूप और अगरबत्ती
  • फल, मिठाई और नैवेद्य
  • पान के पत्ते और सुपारी, जहाँ परंपरा हो
  • पूजा में अर्पित करने के लिए सिक्के
  • आरती की थाली और घंटी

पूजा में उपयोग होने वाली अतिरिक्त सामग्री

कुछ परिवार कमल का फूल, पंचामृत, मौली, कुबेर यंत्र, बही-खाते या अन्य पारंपरिक वस्तुओं का भी उपयोग करते हैं।

इनका उपयोग पारिवारिक और क्षेत्रीय रीति-रिवाजों पर निर्भर करता है।

विशेष सुझाव: शुभ मुहूर्त शुरू होने से पहले फूल, अक्षत, प्रसाद और आरती की सामग्री अलग-अलग थालियों में रख लें।

यदि कोई सामग्री उपलब्ध नहीं है, तो अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार सरल विधि से पूजा की जा सकती है।

घर पर लक्ष्मी कुबेर पूजा कैसे करें? संपूर्ण पूजा विधि

यदि आप पहली बार घर पर लक्ष्मी कुबेर पूजा कर रहे हैं, तो नीचे दी गई सामान्य विधि आपकी सहायता कर सकती है।

ध्यान दें कि अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में मंत्र, पूजा क्रम और सामग्री में अंतर हो सकता है। यदि आपका परिवार किसी विशेष विधि का पालन करता है, तो उसी को प्राथमिकता दें।

चरण 1: पूजा स्थल की सफाई और सजावट करें

सबसे पहले घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें।

एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ। आसपास फूलों, रंगोली और दीपकों से सजावट करें।

पूजा की सभी आवश्यक सामग्री पहले से व्यवस्थित कर लें।

जलते हुए दीपकों को पर्दों और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से सुरक्षित दूरी पर रखें।

चरण 2: देवी-देवताओं की स्थापना करें

चौकी पर माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान कुबेर की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

इनका स्थान अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार निर्धारित करें।

यदि आपके यहाँ कलश स्थापना की परंपरा है, तो कलश में स्वच्छ जल भरकर आम के पत्ते और नारियल रखें।

धार्मिक अनुष्ठानों में कलश को शुभता का प्रतीक माना जाता है।

चरण 3: पूजा का संकल्प लें

पूजा शुरू करने से पहले श्रद्धापूर्वक संकल्प लें।

संकल्प का अर्थ है अपने मन में पूजा करने का उद्देश्य व्यक्त करना।

आप परिवार की सुख-शांति, कल्याण और समृद्धि की कामना करते हुए संकल्प ले सकते हैं।

औपचारिक संस्कृत संकल्प में तिथि, स्थान और पूजा करने वाले व्यक्ति का विवरण शामिल हो सकता है।

चरण 4: भगवान गणेश की पूजा करें

हिंदू धर्म की कई पूजा परंपराओं में भगवान गणेश की आराधना सबसे पहले की जाती है।

भगवान गणेश को फूल, अक्षत और अन्य पारंपरिक सामग्री अर्पित करें।

गणेश मंत्र:

ॐ गं गणपतये नमः।

इस मंत्र का जाप करते हुए बुद्धि, विवेक और शुभ कार्यों की सफलता के लिए प्रार्थना करें।

चरण 5: माता लक्ष्मी की पूजा करें

भगवान गणेश की पूजा के बाद माता लक्ष्मी को फूल, कुमकुम, अक्षत और नैवेद्य अर्पित करें।

माता लक्ष्मी मंत्र:

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार लक्ष्मी स्तोत्र या माता लक्ष्मी के नामों का पाठ भी किया जा सकता है।

इस दौरान परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की प्रार्थना करें।

चरण 6: भगवान कुबेर की पूजा करें

माता लक्ष्मी की पूजा के बाद भगवान कुबेर को फूल, अक्षत और अन्य पारंपरिक सामग्री अर्पित करें।

भगवान कुबेर मंत्र:

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।

कुछ परिवारों में पूजा के दौरान सिक्के या बही-खाते भी रखे जाते हैं।

भगवान कुबेर की आराधना को धन-संपत्ति के संरक्षण और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग से जोड़ा जाता है।

चरण 7: प्रसाद चढ़ाएँ और आरती करें

माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान कुबेर को फल, मिठाई या अन्य नैवेद्य अर्पित करें।

इसके बाद दीपक जलाकर अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार आरती करें।

परिवार के सभी सदस्य इसमें भाग ले सकते हैं।

पूजा समाप्त होने पर प्रसाद वितरित करें।

चरण 8: पूजा का समापन करें

अंत में देवी-देवताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें और परिवार सहित सभी के कल्याण की प्रार्थना करें।

पूजा के बाद दीपक और अगरबत्ती सुरक्षित स्थान पर रखें।

धार्मिक दृष्टि से पूजा का उद्देश्य केवल विधि पूरी करना नहीं, बल्कि श्रद्धा और समर्पण के साथ आराधना करना है।

क्या बिना पंडित के लक्ष्मी कुबेर पूजा कर सकते हैं?

हाँ, घर पर सामान्य लक्ष्मी कुबेर पूजा बिना पंडित के भी की जा सकती है।

कई हिंदू परिवार दिवाली पर स्वयं पूजा करते हैं। इसमें पूजा स्थल की सफाई, दीपक जलाना, गणेश पूजन, लक्ष्मी-कुबेर आराधना, नैवेद्य और आरती शामिल हो सकते हैं।

यदि आप विस्तृत वैदिक अनुष्ठान या किसी विशेष पारंपरिक विधि से पूजा करना चाहते हैं, तो योग्य पुरोहित से मार्गदर्शन ले सकते हैं।

शुभ मुहूर्त और पंचांग से जुड़े प्रश्नों के लिए कुछ श्रद्धालु अनुभवी ज्योतिषाचार्य की सलाह भी लेते हैं।

Anant Gyan से जुड़े ज्योतिष आचार्य राममेहर शर्मा (Jyotish Acharya Rammehar Sharma) को पारंपरिक वैदिक ज्योतिष में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है। यदि आप Best Astrologer in Delhi की तलाश कर रहे हैं, तो मुहूर्त संबंधी मार्गदर्शन के लिए उनके अनुभव, सेवाओं और परामर्श की जानकारी देख सकते हैं।

दिवाली पूजा का समय तय करते समय अपने शहर के विश्वसनीय पंचांग को अवश्य प्राथमिकता दें।

लक्ष्मी कुबेर पूजा करते समय इन गलतियों से बचें

1. दूसरे शहर का शुभ मुहूर्त मान लेना

दिवाली की तिथि एक हो सकती है, लेकिन अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और पंचांग के अनुसार पूजा का समय बदल सकता है।

इसलिए अपने शहर का मुहूर्त देखें।

2. हर पूजा सामग्री को अनिवार्य समझना

कुछ सामग्री विशेष धार्मिक या क्षेत्रीय परंपराओं का हिस्सा होती है।

सभी परिवारों के लिए एक ही सूची अनिवार्य नहीं है।

3. लक्ष्मी पूजा और कुबेर पूजा को एक जैसा समझना

माता लक्ष्मी का संबंध समृद्धि और शुभता से है, जबकि भगवान कुबेर को धन-संपत्ति का संरक्षक माना जाता है।

दोनों की पूजा साथ की जा सकती है, लेकिन उनके धार्मिक स्वरूप अलग हैं।

4. पूजा की तैयारी अंतिम समय पर करना

पूजा की सामग्री और स्थान पहले से तैयार रखें।

इससे शुभ मुहूर्त के दौरान पूजा शांतिपूर्वक की जा सकती है।

5. पूजा से निश्चित आर्थिक लाभ की अपेक्षा करना

लक्ष्मी कुबेर पूजा धार्मिक आस्था का विषय है।

इसे आर्थिक सफलता या धन प्राप्ति की गारंटी नहीं समझना चाहिए।

लक्ष्मी पूजा और लक्ष्मी कुबेर पूजा में क्या अंतर है?

इन दोनों पूजाओं में मुख्य अंतर भगवान कुबेर की आराधना को शामिल करना है।

लक्ष्मी पूजालक्ष्मी कुबेर पूजा
मुख्य रूप से माता लक्ष्मी की आराधनामाता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की आराधना
समृद्धि और शुभता से संबंधितधन के संरक्षण का प्रतीक भी
सामान्यतः गणेश पूजा के साथ की जाती हैगणेश पूजा के साथ कुबेर पूजन भी शामिल हो सकता है
दिवाली पर व्यापक रूप से प्रचलितउन परिवारों में प्रचलित जहाँ कुबेर पूजा की परंपरा है

दोनों में से किसी एक पूजा को दूसरी से श्रेष्ठ मानना आवश्यक नहीं है।

पूजा का चुनाव परिवार की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर निर्भर करता है।

लक्ष्मी कुबेर पूजा का आध्यात्मिक महत्व

दिवाली का वास्तविक महत्व केवल महँगी सजावट, अधिक दीपक जलाने या बड़ी मात्रा में पूजा सामग्री एकत्र करने तक सीमित नहीं है।

यह पर्व प्रकाश, कृतज्ञता और जिम्मेदारी के महत्व को समझने का अवसर देता है।

माता लक्ष्मी की आराधना हमें उपलब्ध संसाधनों का सम्मान करने की प्रेरणा दे सकती है।

वहीं भगवान कुबेर की पूजा धन को सुरक्षित रखने, सोच-समझकर खर्च करने और जरूरतमंदों की सहायता करने के महत्व की याद दिलाती है।

घर की सफाई, पूजा की तैयारी और परिवार के साथ आरती करना भी इस त्योहार को विशेष बनाता है।

इस प्रकार दिवाली लक्ष्मी कुबेर पूजा 2026 का महत्व केवल धार्मिक विधियों तक सीमित नहीं है। यह अपनी परंपराओं को सम्मान देने और जीवन में सकारात्मक संकल्प लेने का अवसर भी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. दिवाली लक्ष्मी कुबेर पूजा 2026 कब है और शुभ मुहूर्त क्या है?

दिवाली लक्ष्मी कुबेर पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 को होगी। नई दिल्ली में लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:54 बजे से 7:50 बजे तक बताया गया है। अन्य शहरों के लिए स्थानीय पंचांग देखें।

2. घर पर लक्ष्मी कुबेर पूजा की सही विधि क्या है?

सामान्य विधि में पूजा स्थल की सफाई, देवी-देवताओं की स्थापना, संकल्प, गणेश पूजा, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की आराधना, नैवेद्य तथा आरती शामिल हैं। विधि में पारिवारिक परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है।

3. लक्ष्मी कुबेर पूजा में कौन-कौन सी सामग्री चाहिए?

पूजा में देवी-देवताओं की मूर्ति या तस्वीर, चौकी, कलश, कुमकुम, अक्षत, फूल, दीपक, धूप, फल और मिठाई जैसी सामग्री उपयोग की जाती है। अतिरिक्त सामग्री पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करती है।

4. क्या बिना पंडित के लक्ष्मी कुबेर पूजा कर सकते हैं?

हाँ, सामान्य घरेलू लक्ष्मी कुबेर पूजा बिना पंडित के की जा सकती है। विस्तृत वैदिक अनुष्ठान या विशेष धार्मिक विधि के लिए पुरोहित का मार्गदर्शन लिया जा सकता है।

5. दिवाली पर माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा एक साथ क्यों की जाती है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता लक्ष्मी समृद्धि और शुभता की देवी हैं, जबकि भगवान कुबेर धन के संरक्षक माने जाते हैं। उनकी संयुक्त पूजा समृद्धि और धन के उचित संरक्षण का प्रतीक है।

निष्कर्ष

दिवाली लक्ष्मी कुबेर पूजा 2026 रविवार, 8 नवंबर को मनाई जाएगी। यह पर्व परिवार के साथ धार्मिक परंपराओं का पालन करने, कृतज्ञता व्यक्त करने और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करने का अवसर है।

पूजा से पहले शुभ मुहूर्त की जानकारी लेना, आवश्यक सामग्री तैयार रखना और पारिवारिक परंपरा के अनुसार विधि का पालन करना पूजा को सरल और व्यवस्थित बना सकता है।

चाहे आप घर पर सामान्य पूजा करें या विस्तृत वैदिक अनुष्ठान, लक्ष्मी कुबेर पूजा का मूल भाव श्रद्धा, समृद्धि, विवेक और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग से जुड़ा है।

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