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नवरात्रि कलश स्थापना 2026 कैसे करें? पूजा सामग्री और चरणबद्ध विधि

By October 8, 2026 Blog
नवरात्रि कलश स्थापना 2026 की पूजा विधि दर्शाता बैनर, पूजा कलश और आचार्य राममेहर शर्मा

नवरात्रि में कलश स्थापना के लिए पूजा स्थल तैयार करें, आवश्यक सामग्री जुटाएं, कलश में जल और पूजन सामग्री रखें, नारियल स्थापित करें और देवी का आवाहन करके पूजा आरंभ करें। जौ या सप्तधान्य बोने तथा संकल्प लेने का क्रम अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें।

पहली बार स्थापना करते समय कई छोटे सवाल सामने आते हैं—कलश में क्या डालना है, पत्ते कैसे रखने हैं, नारियल की व्यवस्था कैसे करनी है और स्थापना के बाद रोज क्या करना है? इन बातों को पहले समझ लेने से पूजा के समय तैयारी अधूरी नहीं रहती।

इस गाइड में नवरात्रि कलश स्थापना 2026 की सामग्री और घरेलू पूजा का सामान्य क्रम सरल भाषा में दिया गया है। विशेष अनुष्ठान और विस्तृत मंत्र-विधि के लिए अपनी परंपरा के अनुसार मार्गदर्शन लें।

कलश स्थापना का क्या महत्व है?

कलश स्थापना, जिसे घटस्थापना भी कहते हैं, नवरात्रि में देवी उपासना की शुरुआत का अनुष्ठान है। धार्मिक परंपरा में कलश को पवित्रता और मंगल का प्रतीक माना जाता है। स्थापना के साथ भक्त देवी का आवाहन करते हैं और पूजा का संकल्प लेते हैं।

इसके बाद दैनिक आरती, भोग और संकल्प के अनुसार पाठ किया जाता है। इसलिए पहले दिन की सजावट के साथ नियमित पूजा की व्यवस्था भी तय करें।

यदि आपके घर में पहले से कोई निश्चित विधि अपनाई जाती है, तो परिवार के बुजुर्गों से उसे समझें। पूजा सामग्री और अनुष्ठान का क्रम क्षेत्र तथा परिवार के अनुसार अलग हो सकता है।

दिल्ली में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

शारदीय नवरात्रि की कलश स्थापना रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को होगी। दिल्ली के लिए घटस्थापना के समय हैं:

  • सुबह का मुहूर्त: सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक।
  • अभिजीत मुहूर्त का विकल्प: सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक।
  • समय क्षेत्र: भारतीय मानक समय।

ये समय दिल्ली के अनुसार हैं। दूसरे शहर में पूजा कर रहे हैं तो अपने स्थान का मुहूर्त देखें।

चौकी और सामग्री पिछले दिन तैयार कर लें। यदि पंडित की सहायता ले रहे हैं, तो उनके आने का समय और आवश्यक तैयारी पहले तय करें।

नवरात्रि की शुरुआत, अष्टमी–नवमी और दिनवार पूजा की जानकारी के लिए हमारा पूरा नवरात्रि पूजा कैलेंडर पढ़ें।

कलश स्थापना के लिए पूजा सामग्री

कलश स्थापना की पूजा सामग्री को अलग-अलग उपयोग के अनुसार व्यवस्थित रखने से पूजा के दौरान सुविधा रहती है।

कलश तैयार करने के लिए

  • मिट्टी या पीतल का स्वच्छ कलश।
  • साफ जल और परंपरा के अनुसार गंगाजल।
  • मौली, सुपारी, सिक्का और अक्षत।
  • पांच आम या अशोक के पत्ते।
  • कलश ढकने के लिए ढक्कन या छोटा पात्र।
  • जटा वाला नारियल और लाल कपड़ा।

जौ या सप्तधान्य बोने के लिए

  • चौड़ा मिट्टी का पात्र।
  • साफ मिट्टी।
  • परंपरा के अनुसार जौ या सप्तधान्य।
  • मिट्टी को हल्का नम करने के लिए पानी।

पूजा और आरती के लिए

  • देवी की तस्वीर या प्रतिमा।
  • चौकी और स्वच्छ वस्त्र।
  • रोली, पुष्प और माला।
  • दीपक, बाती, तेल या घी तथा धूप।
  • फल, मिठाई या घर में तैयार भोग।
  • पूजा की थाली और प्रसाद के पात्र।

विशेष अनुष्ठान करवा रहे हैं तो अंतिम सूची पंडित से लें। कोई सामग्री उपलब्ध न हो तो उसका उपयुक्त विकल्प पहले पूछ लें, ताकि पूजा के समय असमंजस न रहे।

कलश स्थापना की विधि समझने के लिए Best Astrologer in Delhi तलाश रहे हैं? Anant Gyan में आचार्य राममेहर शर्मा से मार्गदर्शन लें।

घर पर कलश स्थापना की चरणबद्ध विधि

नीचे सामान्य घरेलू पूजा का क्रम दिया गया है। विस्तृत संकल्प, मंत्रों और विशेष अनुष्ठानों के लिए अपनी पारिवारिक विधि के अनुसार मार्गदर्शन लें।

1. पूजा स्थल साफ करके चौकी तैयार करें

ऐसा स्थान चुनें जहां पूरे पर्व के दौरान पूजा आसानी से हो सके। चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएं और देवी की तस्वीर या प्रतिमा रखें।

कलश, दीपक और भोग के लिए पर्याप्त जगह छोड़ें। चौकी समतल होनी चाहिए, ताकि स्थापना हिले नहीं। सजावट करते समय यह भी देखें कि आरती का दीपक कपड़े या फूलों से न टकराए।

2. स्नान करके पूजा का संकल्प लें

स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा के लिए बैठें। अपनी परंपरा के अनुसार गणेश स्मरण करें और देवी उपासना का संकल्प लें।

यदि किसी विशेष पाठ या मंत्र-जप का संकल्प लेना चाहते हैं, तो उसकी विधि और आवश्यक समय पहले समझें। नियमित रूप से निभाए जा सकने वाले पूजा क्रम की योजना बनाएं।

3. अनाज बोने का पात्र तैयार करें

चौड़े पात्र में मिट्टी और जौ या सप्तधान्य रखें। ऊपर मिट्टी की हल्की परत डालें और थोड़ा पानी दें।

मिट्टी नम रहे, लेकिन उसमें पानी जमा न हो। बीज बोने और पात्र सजाने का तरीका आपके परिवार में अलग हो तो उसी क्रम का पालन करें।

4. कलश में जल और पूजन सामग्री रखें

कलश के गले पर मौली बांधें। उसमें स्वच्छ जल, सुपारी, सिक्का और अक्षत रखें। पत्ते किनारों पर व्यवस्थित करें और ढक्कन लगाएं।

सामग्री रखने से पहले पात्र की सफाई जांच लें। जल इतना रखें कि स्थापना करते समय बाहर न छलके।

5. नारियल स्थापित करें

जटा वाले नारियल को लाल कपड़े और मौली से तैयार करें। उसे कलश के ऊपर स्थिर रखें। इसके बाद कलश को तैयार अनाज-पात्र में व्यवस्थित स्थापित करें।

नारियल की दिशा या उसे रखने की विशेष विधि आपके घर में निश्चित हो, तो वही अपनाएं। केवल अलग-अलग तस्वीरें देखकर व्यवस्था बदलने के बजाय अपनी परंपरा स्पष्ट करें।

6. देवी का आवाहन और पूजन करें

देवी का आवाहन करें और अपनी विधि के अनुसार पुष्प, धूप, दीप तथा नैवेद्य अर्पित करें। आरती और प्रथम दिन की देवी पूजा करें।

कलश तैयार करना और देवी का आवाहन करना अनुष्ठान के अलग चरण हैं। इसलिए केवल सामग्री सजाकर रखने के बाद पूजा पूरी मान लेने के बजाय निर्धारित पूजन क्रम भी पूरा करें।

कलश में क्या रखें और नारियल कैसे रखें?

सामान्य घरेलू विधि में कलश के भीतर जल, सुपारी, सिक्का और अक्षत रखे जाते हैं। कुछ परंपराओं में अन्य पूजन सामग्री भी शामिल होती है।

नारियल जटा वाला रखें और कपड़े तथा मौली से तैयार करके कलश पर व्यवस्थित स्थापित करें। आधार स्थिर होना चाहिए, ताकि दैनिक पूजा में पुष्प या भोग रखते समय नारियल न फिसले।

यदि सामग्री या नारियल की दिशा को लेकर दो अलग निर्देश मिल रहे हों, तो अपने परिवार की विधि अपनाने वाले पंडित से पूछें। हर परंपरा को एक ही तरीके में समेटना आवश्यक नहीं है।

स्थापना के बाद दैनिक पूजा और देखभाल

कलश स्थापना के बाद नियमित पूजा का समय तय करें। देवी का स्मरण, भोग और आरती अपनी परंपरा के अनुसार करें। पाठ का संकल्प लिया है तो उसका क्रम बनाए रखें।

दैनिक व्यवस्था में इन बातों का ध्यान रखें:

  • भोग के बर्तन साफ करें और प्रसाद देर तक खुला न छोड़ें।
  • खराब हो चुके पुष्प श्रद्धापूर्वक हटाएं।
  • अनाज की मिट्टी में जरूरत के अनुसार नमी रखें।
  • पूजा स्थल के पास इस्तेमाल हुआ सामान जमा न होने दें।
  • दीपक और धूप को कपड़े, पर्दे तथा कागज से दूर रखें।

जौ कम उगने को तुरंत अशुभ संकेत न मानें। बीज, मिट्टी, पानी और वातावरण अंकुरण को प्रभावित करते हैं। पहले इन स्थितियों को देखें।

अखंड ज्योति का संकल्प अलग जिम्मेदारी है। इसे रखने से पहले सुरक्षित और निरंतर देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

पहली बार स्थापना करते समय किन गलतियों से बचें?

पूजा शुरू होने के बाद सामग्री जुटाना या विधि खोजना तैयारी में बाधा बन सकता है। पिछले दिन सूची देखकर सामान जांच लें और अपने प्रश्न स्पष्ट कर लें।

खास तौर पर:

  • अपने शहर का मुहूर्त ही देखें।
  • कलश रखने के लिए स्थिर स्थान चुनें।
  • अलग-अलग परंपराओं के नियम बिना समझे न मिलाएं।
  • जौ के पात्र में अधिक पानी न डालें।
  • दैनिक पूजा और समापन की जिम्मेदारी पहले तय करें।

कोई छोटी कमी रह जाए तो घबराने के बजाय उसके समाधान के लिए मार्गदर्शन लें।

Anant Gyan में आचार्य राममेहर शर्मा से मार्गदर्शन

पूजा की तैयारी में अनुभव का महत्व तब समझ आता है जब आपके प्रश्न सामान्य सूची से आगे जाते हैं—घर की पुरानी विधि कैसे निभाएं, संकल्प का क्रम क्या रखें या विशेष अनुष्ठान के लिए क्या तैयारी करें?

Anant Gyan के ज्योतिष आचार्य राममेहर शर्मा वैदिक ज्योतिष में 30 से अधिक वर्षों का अनुभव रखते हैं। दिल्ली के शालीमार बाग स्थित केंद्र में उनसे संपर्क करके अपनी पूजा संबंधी आवश्यकताओं पर चर्चा कर सकते हैं।

बात करते समय बताएं कि आप पहली बार स्थापना कर रहे हैं या पारिवारिक परंपरा के किसी चरण को समझना चाहते हैं। उपलब्ध मार्गदर्शन, समय और शुल्क की जानकारी पहले लें।

इस नवरात्रि, अपनी पूजा की तैयारी अनुभव के साथ करें कलश स्थापना संबंधी मार्गदर्शन के लिए Anant Gyan में आचार्य राममेहर शर्मा से संपर्क करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. नवरात्रि कलश स्थापना 2026 किस दिन होगी?

कलश स्थापना 11 अक्टूबर 2026, रविवार को होगी। दिल्ली में सुबह का मुहूर्त 6:19 से 10:12 बजे तक है।

2. सुबह का मुहूर्त छूट जाए तो क्या करें?

दिल्ली के लिए अभिजीत विकल्प 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक दिया गया है। वह भी छूट जाए तो स्वयं समय चुनने के बजाय स्थानीय पंचांग के अनुसार मार्गदर्शन लें।

3. क्या जौ बोना हर घर में जरूरी है?

जौ या सप्तधान्य बोने की परंपरा कई परिवारों में है। अपने घर की पूजा-विधि समझकर निर्णय लें; सभी परिवारों का क्रम समान नहीं होता।

4. क्या घर पर स्वयं कलश स्थापना कर सकते हैं?

विधि समझते हैं तो अपनी परंपरा के अनुसार स्वयं कर सकते हैं। संकल्प, मंत्र या विशेष अनुष्ठान स्पष्ट न हो तो जानकार पंडित की सहायता लें।

5. कलश स्थापना के बाद उसे रोज हटाना चाहिए?

स्थापना के लिए शुरुआत में ही सुविधाजनक स्थान चुनें, ताकि उसे बार-बार हटाने की जरूरत न पड़े। किसी कारण स्थान बदलना आवश्यक हो तो अपनी पूजा-विधि के अनुसार मार्गदर्शन लें।

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