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नवरात्रि पूजा विधि: घर पर नौ दिनों की पूजा कैसे करें?

By October 9, 2026 Blog

घर पर नवरात्रि पूजा के लिए स्वच्छ स्थान पर मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। अपनी परंपरा के अनुसार पहले दिन कलश स्थापना और पूजा का संकल्प लें। रोज देवी का स्मरण, पुष्प अर्पण, भोग, पाठ और आरती करें। अष्टमी या नवमी पर पारिवारिक परंपरा के अनुसार कन्या पूजन तथा निर्धारित समय पर पूजा का समापन करें।

पहली बार नवरात्रि पूजा करने पर सबसे बड़ा सवाल यही होता है रोज क्या करना है और किस क्रम में करना है? क्या दुर्गा सप्तशती का पूरा पाठ जरूरी है? सुबह पूजा न हो पाए तो क्या करें? क्या व्रत और अखंड ज्योति के बिना भी देवी की उपासना कर सकते हैं?

यह लेख नवरात्रि पूजा विधि का सामान्य घरेलू क्रम समझाता है। विस्तृत मंत्र, विशेष अनुष्ठान और पारिवारिक विधियां अलग हो सकती हैं। घर में पहले से चली आ रही पूजा हो तो उसी परंपरा को प्राथमिकता दें।

पूजा शुरू करने से पहले क्या तैयारी करें?

ऐसा स्थान चुनें जहां पूरे पर्व के दौरान नियमित पूजा हो सके। चौकी स्थिर हो और परिवार के बैठने के लिए पर्याप्त जगह हो। दीपक रखने का स्थान पर्दों, कागज और सजावटी कपड़ों से दूर रखें।

पूजा शुरू होने से पहले तीन जिम्मेदारियां तय कर लें:

  • दैनिक पूजा और आरती कौन करेगा?
  • भोग तथा पूजा स्थल की सफाई कौन संभालेगा?
  • पाठ, कन्या पूजन और समापन की तैयारी कैसे होगी?

यदि आप नौकरी करते हैं, तो अपनी दिनचर्या के अनुसार पूजा का समय रखें। ऐसा विस्तृत संकल्प लेने से बचें जिसके लिए आवश्यक समय और व्यवस्था उपलब्ध न हो।

नवरात्रि पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

सामान्य घरेलू पूजा के लिए ये वस्तुएं तैयार रख सकते हैं:

  • मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा।
  • चौकी और स्वच्छ वस्त्र।
  • रोली या कुमकुम, अक्षत और मौली।
  • पुष्प तथा माला।
  • दीपक, बाती और अपनी परंपरा के अनुसार घी या तेल।
  • धूप, पूजा की थाली और घंटी।
  • स्वच्छ जल और छोटे पात्र।
  • फल या घर में तैयार भोग।
  • जिस पाठ का संकल्प लिया है, उसकी पुस्तक।

कलश स्थापना करते हैं तो उसकी सामग्री अलग तैयार करें। अखंड ज्योति, हवन और विशेष अनुष्ठान की सामग्री इस सामान्य सूची से अलग हो सकती है।

सामान कम पड़ने की चिंता से बचने के लिए पिछले दिन सूची जांच लें। किसी विशेष वस्तु का विकल्प चाहिए तो पहले पूछें।

पहले दिन पूजा कैसे शुरू करें?

पहले दिन स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल व्यवस्थित करें। अपनी परंपरा के अनुसार गणेश स्मरण के बाद देवी उपासना का संकल्प लें।

संकल्प में यह स्पष्ट रखें कि आप दैनिक पूजा, किसी पाठ, व्रत या विशेष अनुष्ठान में से क्या करेंगे। विस्तृत संकल्प-मंत्र नहीं जानते तो अनुमान से शब्द जोड़ने के बजाय उसका सही क्रम समझें।

घर में कलश स्थापना की परंपरा है तो स्थानीय मुहूर्त और निर्धारित विधि के अनुसार स्थापना करें। इसके बाद देवी का आवाहन, पूजन, भोग और आरती करें।

कलश की सामग्री और स्थापना का विस्तृत क्रम हमारे “नवरात्रि कलश स्थापना 2026 कैसे करें?” लेख में पढ़ सकते हैं।

रोज की नवरात्रि पूजा का चरणबद्ध क्रम

नीचे दिया क्रम सरल घरेलू उपासना के लिए है। आपके परिवार में किसी चरण का क्रम अलग हो तो अपनी विधि अपनाएं।

1. पूजा स्थल साफ और व्यवस्थित करें

पूजा से पहले उपयोग किए हुए भोग-पात्र साफ करें। खराब हो चुके पुष्प हटाएं और चौकी के आसपास पड़ा सामान व्यवस्थित करें।

स्थापित कलश या प्रतिमा को रोज हटाने की जरूरत न पड़े, इसलिए शुरुआत में ही सुविधाजनक स्थान चुनें। जौ बोए हैं तो मिट्टी में जरूरत के अनुसार नमी रखें; पानी जमा न होने दें।

2. देवी का स्मरण करें

शांत होकर बैठें और मां दुर्गा का स्मरण करें। पूजा का उद्देश्य मन को उपासना में लगाना है, इसलिए जल्दबाजी में कई काम एक साथ करने के बजाय कुछ समय पूजा के लिए रखें।

परिवार साथ बैठ सकता है तो स्मरण, पाठ या आरती में सबको शामिल करें।

3. दीपक जलाएं और पूजन करें

अपनी परंपरा के अनुसार दीपक और धूप जलाएं। देवी को रोली या कुमकुम, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।

तस्वीर या सामान्य सजावटी प्रतिमा पर जल डालने से उसे नुकसान हो सकता है। अभिषेक केवल उसी प्रतिमा और विधि में करें जिसके लिए वह उपयुक्त हो।

दीपक समतल आधार पर रखें और बच्चों की पहुंच से दूर रखें।

4. निर्धारित पाठ या मंत्र-जप करें

जिस पाठ का संकल्प लिया है, उसका क्रम निभाएं। दुर्गा चालीसा, स्तुति या अपनी परंपरा में अपनाए जाने वाले पाठ के लिए स्पष्ट अक्षरों वाली पुस्तक रखें।

दुर्गा सप्तशती का अनुष्ठानिक पाठ कर रहे हैं तो उसके अंग, क्रम और उच्चारण पहले समझ लें। पढ़ने में कठिनाई हो तो जानकार व्यक्ति की सहायता लें।

किसी विशेष पाठ को हर घर की सरल पूजा का अनिवार्य नियम न मानें। अपनी विधि के अनुसार उपासना करें।

5. भोग अर्पित करें

फल या घर में तैयार सात्त्विक भोजन स्वच्छ पात्र में रखें। भोग बनाते समय परिवार की पूजा-परंपरा और सामग्री के नियमों का ध्यान रखें।

हर दिन महंगा या कठिन पकवान तैयार करना जरूरी नहीं है। उपलब्ध सामग्री से व्यवस्थित तैयारी करें। पूजा के बाद प्रसाद उचित तरीके से बांटें और बचा हुआ भोजन सुरक्षित रखें।

6. आरती और प्रार्थना करें

पाठ और भोग के बाद अपनी विधि के अनुसार आरती करें। आरती का दीपक घुमाते समय पास के कपड़े, फूल और सजावट से दूरी रखें।

अंत में देवी को प्रणाम करें। इसके बाद प्रसाद वितरित करें और दीपक की देखभाल सुनिश्चित करें।

नौ देवी स्वरूपों की पूजा कैसे करें?

नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना की जाती है। उनका प्रचलित क्रम है:

  1. मां शैलपुत्री
  2. मां ब्रह्मचारिणी
  3. मां चंद्रघंटा
  4. मां कूष्मांडा
  5. मां स्कंदमाता
  6. मां कात्यायनी
  7. मां कालरात्रि
  8. मां महागौरी
  9. मां सिद्धिदात्री

दैनिक पूजा में संबंधित स्वरूप का नाम लेकर स्मरण कर सकते हैं। हर स्वरूप की अलग प्रतिमा खरीदना आवश्यक नहीं है; घर की पूजा-व्यवस्था के अनुसार उपासना करें।

स्वरूप का दिन तय करते समय संबंधित वर्ष का तिथि-आधारित कैलेंडर देखें। अंग्रेजी तारीखों को केवल एक से नौ गिनकर पूजा का दिन तय करना हमेशा सही नहीं होगा।

2026 की दिनवार जानकारी के लिए अपने प्रकाशित नवरात्रि पूजा कैलेंडर का संदर्भ रखें।

क्या सुबह और शाम दोनों समय पूजा जरूरी है?

कई घरों में सुबह मुख्य पूजा और शाम को आरती होती है। लेकिन आपके संकल्प में क्या शामिल है, यह पहले स्पष्ट होना चाहिए।

सरल घरेलू पूजा कर रहे हैं तो उपलब्ध समय के अनुसार नियमित व्यवस्था रखें। सुबह पूरा परिवार नहीं बैठ सकता तो एक व्यक्ति पूजा कर सकता है और अन्य सदस्य सुविधानुसार प्रार्थना या आरती में शामिल हो सकते हैं।

किसी निश्चित समय या विशेष अनुष्ठान का संकल्प लिया है तो उसे बदलने से पहले मार्गदर्शन लें।

क्या व्रत और अखंड ज्योति के बिना पूजा कर सकते हैं?

व्रत, दैनिक देवी पूजा और अखंड ज्योति अलग-अलग संकल्प हैं। सभी परिवार इन तीनों को एक साथ नहीं अपनाते। केवल दैनिक पूजा करने के लिए अपने ऊपर ऐसा उपवास या अनुष्ठान न जोड़ें जिसकी व्यवस्था आपने नहीं की है।

अखंड ज्योति रखने का संकल्प लें तो निरंतर देखभाल की जिम्मेदारी तय करें। घी या तेल की व्यवस्था, स्थिर आधार और आसपास की सुरक्षा का ध्यान रखें।

सामान्य दैनिक दीपक जलाते हैं तो उसे भी बिना देखभाल के न छोड़ें।

अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन कैसे करें?

कई परिवारों में अष्टमी और कुछ में नवमी पर कन्या पूजन होता है। अपने घर की परंपरा और संबंधित तिथि के अनुसार समय तय करें।

आमंत्रित बच्चों तथा उनके अभिभावकों को समय पहले बता दें। बैठने, हाथ धोने और भोजन की उचित व्यवस्था रखें। भोजन से जुड़ी एलर्जी या विशेष जरूरत हो तो पहले पूछें।

पारिवारिक विधि के अनुसार सम्मानपूर्वक पूजन, भोजन और दक्षिणा या उपहार दें। बच्चों की सहजता और सुविधा का ध्यान रखना तैयारी का आवश्यक हिस्सा है।

नवरात्रि पूजा का समापन कैसे करें?

समापन से पहले देखें कि आपके संकल्प में हवन, कन्या पूजन, पारण या कलश विसर्जन में से क्या शामिल है। इन सभी का समय और क्रम एक जैसा नहीं होता।

हवन करते हैं तो उसकी सामग्री और विधि पहले समझें। घर पर अग्नि की सुरक्षित व्यवस्था न हो तो जानकार पंडित की सहायता लें।

कलश, नारियल, जौ और दूसरी पूजा सामग्री का समापन अपनी परंपरा तथा स्थानीय व्यवस्था के अनुसार करें। प्लास्टिक, कपड़ा और अन्य कचरा जलाशयों में न डालें।

पूजा की तैयारी में आचार्य राममेहर शर्मा से मार्गदर्शन लें

पहली बार पूजा करते समय केवल सामग्री की सूची पर्याप्त नहीं होती। संकल्प कैसे लेना है, पाठ का क्रम क्या होगा और घर की पुरानी परंपरा कैसे निभानी है इन प्रश्नों के लिए व्यक्तिगत चर्चा उपयोगी हो सकती है।

Anant Gyan के ज्योतिष आचार्य राममेहर शर्मा वैदिक ज्योतिष में 30 से अधिक वर्षों का अनुभव रखते हैं। दिल्ली के शालीमार बाग स्थित केंद्र में उनसे संपर्क करके नवरात्रि पूजा संबंधी उपलब्ध मार्गदर्शन की जानकारी लें।

अपने प्रश्न पहले लिखें और बताएं कि आप सरल घरेलू पूजा करेंगे या किसी विशेष अनुष्ठान की तैयारी कर रहे हैं। इससे सामग्री, समय और पूजा के क्रम पर बातचीत स्पष्ट रहेगी।

इस नवरात्रि, पूजा का संकल्प और पूरा क्रम समझकर शुरुआत करें  Anant Gyan में आचार्य राममेहर शर्मा से मार्गदर्शन के लिए संपर्क करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या घर पर बिना पंडित के नवरात्रि पूजा कर सकते हैं?

सरल दैनिक पूजा अपनी पारिवारिक विधि समझकर कर सकते हैं। विशेष अनुष्ठान, विस्तृत संकल्प या मंत्र-विधि स्पष्ट न हो तो पहले मार्गदर्शन लें।

2. क्या रोज दुर्गा सप्तशती का पूरा पाठ जरूरी है?

हर घरेलू पूजा में पूरा पाठ अनिवार्य नहीं माना जाता। जिस पाठ का संकल्प लिया है, उसी के निर्धारित क्रम का पालन करें।

3. क्या रोज अलग भोग चढ़ाना जरूरी है?

अलग-अलग भोग की परंपरा कुछ परिवारों में होती है। अपने घर की विधि के अनुसार स्वच्छ और उपलब्ध सामग्री से भोग तैयार करें।

4. क्या कलश स्थापना के बिना देवी पूजा कर सकते हैं?

कई घरों में देवी की तस्वीर या प्रतिमा के सामने दैनिक उपासना की जाती है। विशेष नवरात्रि अनुष्ठान या पारिवारिक संकल्प हो तो उसकी विधि पहले स्पष्ट करें।

5. किसी दिन पूजा का समय छूट जाए तो क्या करें?

उपलब्ध समय में श्रद्धापूर्वक पूजा करें। निश्चित समय वाले विशेष संकल्प में व्यवधान आया हो तो अपनी विधि के जानकार पंडित से समाधान पूछें।

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