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नाग पंचमी का पर्व

By August 2, 2022 Blog

सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। आमतौर पर नाग पंचमी का दिन हरियाली तीज के दो दिन बाद पड़ता है। वर्तमान में नाग पंचमी जुलाई और अगस्त के महीने में आती है। इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती हैं और सांपों को दूध चढ़ाते हैं। महिलाएं भी अपने भाइयों और परिवार की भलाई के लिए प्रार्थना करती हैं। नाग पंचमी पूरे भारत में हिंदुओं द्वारा मनाई जाने वाली नाग देवताओं की एक पारंपरिक पूजा है। हिंदू मान्यताओं में, कुछ दिनों को नाग देवताओं की पूजा करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है और विशेष रूप से श्रावण महीने के दौरान पंचमी तिथि को नाग देवताओं की पूजा करने के लिए अत्यधिक शुभ माना जाता है। नाग पंचमी उन महत्वपूर्ण दिनों में से एक है।

महत्त्व

ऐसा माना जाता है कि सांपों को अर्पित की गई कोई भी पूजा नाग देवताओं तक पहुंचती है। इसलिए लोग नाग देवताओं के प्रतिनिधि के रूप में उस दिन जीवित सांपों की पूजा करते हैं जो हिंदू धर्म में पूजनीय हैं।

नाग पंचमी के त्योहार की महत्व हिंदू शास्त्रों में जाना जा सकता हैं। नागों का जन्म कश्यप की तीसरी पत्नी से हुआ था जो ब्रह्मा के पुत्र हैं। तो, नाग देवताओं के सौतेले भाई थे। उन्होंने पाताल लोक पर शासन किया। शास्त्रों में आठ प्रमुख नागों का वर्णन किया गया है। उनमें से एक कालिया नाग था जो दुष्ट था । जब कृष्ण – भगवान विष्णु के अवतार केवल एक बालक थे, उन्होंने कालिया को हरा दिया और उनके सिर पर नृत्य किया, जिससे उनके कुकर्मों का अंत हो गया। नाग पंचमी उस दिन का प्रतीक है जिस दिन कृष्ण ने कालिया को हराया था। इस दिन नाग देवता की पूजा करने से घर में सुख और समृद्धि का वास होता है।

नागपंचमी तिथि

इस बार नाग पंचमी का त्योहार 02 अगस्त 2022 को मनाया जाएगा। इस बार नागपंचमी का पर्व विशेष योग में मनाया जाएगा। इन योगों में नागपंचमी का पर्व मनाने से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं। आइए जानते हैं नाग पंचमी के शुभ योग के बारे में।

पंचमी तिथि प्रारंभ: 2 अगस्त 2022, मंगलवार, प्रातः 05:13 से

पंचमी तिथि समाप्त: 3 अगस्त 2022, बुधवार, प्रातः 05:41 पर

नाग पंचमी पूजा मुहूर्त: 2 अगस्त 2022, मंगलवार, प्रातः 06:05 से प्रातः 08:41 तक

नाग पंचमी पूजन विधि

• नाग पंचमी में 12 नागों की पूजा की जाती है। आप अपने दरवाजे पर पूजा करने के लिए नाग चित्र बनाये या मिटटी की सर्प मूर्ति को लकड़ी की चौकी के ऊपर स्थान दें और फिर पूजा करें।

• नाग देवता को रोली, चावल और फूल अर्पित करें और उनको धूप दीप करें ।

• अब कच्चा दूध, घी, चीनी मिलाकर नाग देवता को अर्पित करें।

• पूजा के बाद नाग पंचमी की कथा सुनें और आरती करें।

• यदि नागपंचमी का व्रत रखना है तो चतुर्थी के दिन एक बार भोजन करें और पंचमी के दिन उपवास करके शाम को भोजन करें।

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