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सावन शिवरात्रि पर चार प्रहर पूजा कैसे होती है? जानें संपूर्ण विधि और महत्व

By July 30, 2026 Blog

सावन शिवरात्रि भगवान शिव के भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र और शुभ पर्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु पूरे दिन व्रत रखते हैं और रात्रि में भगवान शिव की चार प्रहर पूजा करते हैं। मान्यता है कि प्रत्येक प्रहर में विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होकर सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, वैवाहिक जीवन की खुशहाली तथा मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

ज्योतिषाचार्य राममेहर शर्मा के अनुसार, सावन शिवरात्रि की चार प्रहर पूजा केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और शिव कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम भी मानी जाती है।

चार प्रहर पूजा क्या होती है?

रात्रि को चार समान भागों (प्रहर) में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक प्रहर में भगवान शिव का अभिषेक, मंत्र जाप और विशेष पूजन किया जाता है। हर प्रहर का अपना अलग आध्यात्मिक महत्व माना गया है।

प्रथम प्रहर की पूजा

महत्व

  • जीवन से नकारात्मकता दूर करने का समय।
  • मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
  • भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रथम चरण।

पूजा विधि

  • स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • शिवलिंग पर शुद्ध जल अर्पित करें।
  • गंगाजल से अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा, आक, भांग और सफेद पुष्प अर्पित करें।
  • चंदन का तिलक लगाएं।
  • धूप और दीप जलाएं।
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
  • शिव चालीसा या शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करें।

द्वितीय प्रहर की पूजा

महत्व

  • परिवार की सुख-समृद्धि और आर्थिक उन्नति के लिए विशेष माना जाता है।
  • ग्रह दोषों की शांति में सहायक माना जाता है।

पूजा विधि

  • शिवलिंग का दूध से अभिषेक करें।
  • इसके बाद जल अर्पित करें।
  • सफेद फूल और बेलपत्र चढ़ाएं।
  • शहद एवं दही अर्पित करें।
  • कपूर से आरती करें।
  • महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।

मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

तृतीय प्रहर की पूजा

महत्व

  • रोग, कष्ट और बाधाओं से मुक्ति का समय।
  • वैवाहिक जीवन एवं संतान सुख की कामना के लिए शुभ माना जाता है।

पूजा विधि

  • शिवलिंग पर दही और घी से अभिषेक करें।
  • शक्कर या मिश्री अर्पित करें।
  • फल और मिठाई का भोग लगाएं।
  • रुद्राष्टक का पाठ करें।
  • भगवान शिव का ध्यान करें।
  • परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।

चतुर्थ प्रहर की पूजा

महत्व

  • मोक्ष, आध्यात्मिक उन्नति और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति का प्रतीक।
  • अंतिम प्रहर की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

पूजा विधि

  • शिवलिंग पर शहद, गन्ने का रस (यदि उपलब्ध हो) तथा अंत में शुद्ध जल अर्पित करें।
  • पंचामृत से अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, भस्म, चंदन और पुष्प अर्पित करें।
  • घी का दीपक जलाएं।
  • शिव आरती करें।
  • भगवान शिव से क्षमा प्रार्थना करें।
  • प्रसाद वितरित करें।

चारों प्रहर में क्या करें?

  • भगवान शिव के मंत्रों का निरंतर जाप करें।
  • पूरी श्रद्धा और एकाग्रता से पूजा करें।
  • रात्रि जागरण करें।
  • शिव पुराण या शिव कथा का श्रवण करें।
  • गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को दान दें।
  • सात्विक विचार और संयम बनाए रखें।

पूजा में आवश्यक सामग्री

  • शिवलिंग
  • गंगाजल
  • शुद्ध जल
  • दूध
  • दही
  • घी
  • शहद
  • शक्कर या मिश्री
  • पंचामृत
  • बेलपत्र
  • धतूरा
  • भांग
  • आक के फूल
  • सफेद पुष्प
  • चंदन
  • धूप
  • दीपक
  • कपूर
  • फल एवं प्रसाद

सावन शिवरात्रि पर क्या नहीं करना चाहिए?

  • तामसिक भोजन का सेवन न करें।
  • क्रोध, झूठ और अपशब्दों से बचें।
  • बेलपत्र खंडित या सूखे हुए न चढ़ाएं।
  • शिवलिंग पर हल्दी और तुलसी अर्पित न करें।
  • पूजा में जल्दबाजी न करें।
  • बिना श्रद्धा के केवल औपचारिक पूजा करने से बचें।

सावन शिवरात्रि की चार प्रहर पूजा के लाभ

धार्मिक लाभ

  • भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • पापों का क्षय होने की मान्यता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति होती है।

पारिवारिक लाभ

  • दांपत्य जीवन में मधुरता आती है।
  • परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
  • संतान सुख की प्राप्ति की कामना पूर्ण होने की मान्यता है।

मानसिक लाभ

  • तनाव और चिंता में कमी आती है।
  • सकारात्मक सोच विकसित होती है।
  • मन में आत्मविश्वास और शांति का संचार होता है।

ज्योतिषाचार्य राममेहर शर्मा की विशेष सलाह

ज्योतिषाचार्य राममेहर शर्मा का कहना है कि सावन शिवरात्रि की चार प्रहर पूजा केवल विधि-विधान तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धा, संयम और सच्ची भक्ति का उत्सव है। यदि प्रत्येक प्रहर में शिवलिंग का अभिषेक, “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप तथा भगवान शिव का ध्यान पूरी आस्था के साथ किया जाए, तो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का अनुभव हो सकता है। साथ ही, पूजा के बाद दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता करने से इस पर्व का पुण्यफल और अधिक बढ़ जाता है।

निष्कर्ष

सावन शिवरात्रि की चार प्रहर पूजा भगवान शिव की आराधना का अत्यंत प्रभावशाली और पवित्र स्वरूप मानी जाती है। प्रत्येक प्रहर की पूजा का अपना अलग महत्व और विधि है। श्रद्धा, नियम और भक्ति के साथ की गई यह पूजा जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। यदि आप इस पावन अवसर पर पूरी निष्ठा से भगवान शिव की उपासना करते हैं, तो भोलेनाथ की कृपा से जीवन में सकारात्मकता और मंगलमय परिवर्तन का अनुभव कर सकते हैं।

अधिक जानकारी और परामर्श के लिए विजिट करें:  ANANT GYAN

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