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तुलसी विवाह

By November 3, 2022 Blog

सनातन धर्म में कार्तिक मास के देवउठनी एकादशी को ही तुलसी विवाह के रूप में मनाए जाने की प्रथा है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु अपनी योग निद्रा से चतुर्मास के बाद जागते हैं। जिसके बाद द्वादशी तिथि को तुलसी विवाह होता है। इस दिन तुलसी माता का विवाह भगवान विष्णु के स्वरूप शालीग्राम के साथ कराया जाता है। एक लोकप्रिय कथा में, विष्णु ने अगले जन्म में वृंदा से विवाह करने के आशीर्वाद दिया, विष्णु – शालिग्राम के रूप में – प्रबोधिनी एकादशी पर तुलसी से विवाह किया। तब से तुलसी विवाह का समारोह किया जाता है।
तुलसी विवाह का महत्व
सनातन हिंदू धर्म में तुलसी को एक पवित्र पौधे के रूप में जानते हैं। तुलसी को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। हर साल इस दिन तुलसी जी का विवाह भगवान विष्णु के स्वरूप शालीग्राम के साथ कराया जाता है। मान्यता है कि कार्तिक महीने में जो भक्त तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह करते हैं, उनके पिछले जन्मों के सब पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन घर-घर में स्त्रियां शालिग्राम और तुलसी का विवाह रचाती हैं। तुलसी जी को विष्णुप्रिया भी कहा जाता है। कार्तिक मास की नवमी, दशमी और एकादशी को व्रत एवं पूजन कर तुलसी विवाह किया जाता है। इसके अगले दिन तुलसी का पौधा किसी ब्राह्मण को दान करना शुभ माना जाता है। तुलसी विवाह संपन्न कराने वालों को वैवाहिक सुख मिलता है। तुलसी विवाह के बाद से ही शादी-विवाह के शुभ मुहूर्त भी शुरू हो जाते हैं।

आइये जानते हैं तुलसी विवाह के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
सबसे पहले जानते है की तुलसी विवाह के लिए क्या सामग्री चाहिए।
तुलसी का पौधा, भगवान शालिग्राम की प्रतिमा, चौकी, गन्ना, मूली, आंवला, बेर, सिंघाड़ा, सीताफल, मंगूफली, अमरूद सहित अन्य मौसमी फल
इसके अलावा धूप, दीपक, वस्त्र, फूल और माला, सुहाग का सामान, सुहाग का प्रतीक, लाल चुनरी, साड़ी, हल्दी, कुमकुम, कलश, जल, पान के पत्ते, कपूर, प्रसाद में हलवा पूरी, खीर , आद।
विधि
तुलसी विवाह के दिन प्रातः काल स्नानआदि कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मंदिर या आंगन जहाँ ये पूजा होनी है वहां साफ़ सफाई कर लें। तुलसी विवाह पूजन संध्या कल में की जाती है। तुलसी विवाह के लिए एक चौकी में लाल या पीला वस्त्र बिछाएं और उसमें तुलसी का पौधा और शालिग्राम को स्थापित करें। चौकी के नीचे एख मुट्ठी अनाज रखें। इसके बाद तुलसी जी और शालीग्राम को गंगाजल छिड़क कर स्नान कराएं। चौकी के पास एक कलश में जल भरकर रखें और उसमें पांच या फिर सात आम के पत्ते लगाकर पूजा स्थल पर स्थापित करें। और घी का दीप जलाएं।
इसके बाद तुलसी और शालीग्राम को रोली व चंदन का तिलक लगाएं।
तुलसी पौधे के गमले में गन्ने का मंडप बनाएं। तुलसी पौधे में सिंदूर लगाएं, लाल चुनरी चढ़ाएं और श्रृंगार का सामान सिंदूर, चूड़ी, बिंदी आदि चढ़ाएं। हाथ में शालीग्राम रखकर तुलसी जी की परिक्रमा करें और इसके बाद आरती भी करें।
पूजा समाप्त होने के बाद तुलसी माता और भगवान शालीग्राम से सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करें।
शुभ मुहूर्त – तुलसी विवाह का शुभ समय कार्तिक द्वादशी तिथि 5 नवंबर 2022 को शाम 6:08 से प्रारंभ होकर 6 नवंबर 2022 शाम 5:06 पर समाप्त होगा।

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