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निर्जला एकादशी व्रत कैसे करें? संपूर्ण पूजा विधि, नियम और महत्व

By June 19, 2026 Blog

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। वर्ष भर आने वाली 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ और फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत करने से वर्ष भर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। ज्योतिषाचार्य राममेहर शर्मा के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत व्यक्ति के जीवन से नकारात्मक ऊर्जा, आर्थिक बाधाओं और मानसिक तनाव को दूर करने में सहायक माना जाता है।

1. निर्जला एकादशी क्या है?

व्रत का परिचय

  • ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है।
  • इस दिन अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है।
  • इसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।

धार्मिक मान्यता

  • महाभारत काल में भीमसेन ने महर्षि व्यास के कहने पर यह व्रत रखा था।
  • इस व्रत से सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है।

2. निर्जला एकादशी व्रत का महत्व

आध्यात्मिक लाभ

  • भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • पापों का नाश होता है।
  • मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

ज्योतिषीय लाभ

  • ग्रह दोषों के प्रभाव में कमी आती है।
  • जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
  • पारिवारिक कलह और मानसिक तनाव दूर होते हैं।

स्वास्थ्य संबंधी लाभ

  • शरीर को शुद्ध करने का अवसर मिलता है।
  • आत्मसंयम और मानसिक शक्ति बढ़ती है।

3. निर्जला एकादशी व्रत की तैयारी

एक दिन पहले क्या करें?

  • सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन से बचें।
  • मन में भगवान विष्णु का स्मरण करें।

आवश्यक पूजा सामग्री

  • भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र
  • पीला वस्त्र
  • तुलसी दल
  • पंचामृत
  • धूप, दीप
  • फूलों की माला
  • फल एवं नैवेद्य
  • गंगाजल

4. निर्जला एकादशी की संपूर्ण पूजा विधि

प्रातःकालीन तैयारी

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठें।
  • स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान को साफ करें।

व्रत संकल्प लें

  • भगवान विष्णु का ध्यान करें।
  • निर्जला व्रत का संकल्प लें।
  • पूरे दिन जल ग्रहण न करने का निश्चय करें।

भगवान विष्णु की पूजा

  • भगवान विष्णु को पीले वस्त्र अर्पित करें।
  • चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
  • तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं।
  • धूप और दीप जलाएं।

मंत्र जाप करें

विष्णु मंत्र

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”

विष्णु गायत्री मंत्र

“ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।”

कथा श्रवण

  • निर्जला एकादशी व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
  • भगवान विष्णु के भजन और कीर्तन करें।

5. व्रत के दौरान पालन करने योग्य नियम

क्या करें?

  • भगवान का ध्यान करें।
  • धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।
  • दान-पुण्य करें।
  • क्रोध और विवाद से बचें।

क्या न करें?

  • झूठ न बोलें।
  • किसी का अपमान न करें।
  • तामसिक विचारों से दूर रहें।
  • व्रत के दौरान जल का सेवन न करें (यदि स्वास्थ्य अनुमति देता हो)।

6. निर्जला एकादशी पर दान का महत्व

क्या दान करें?

  • जल से भरा घड़ा
  • छाता
  • वस्त्र
  • फल
  • अन्न
  • पंखा
  • दक्षिणा

दान के लाभ

  • पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • जीवन में सुख और समृद्धि आती है।
  • पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

7. व्रत का पारण कैसे करें?

पारण का समय

  • द्वादशी तिथि में शुभ मुहूर्त पर व्रत खोलें।

पारण विधि

  • भगवान विष्णु को भोग लगाएं।
  • तुलसी युक्त जल ग्रहण करें।
  • सात्विक भोजन करें।
  • ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं।

8. निर्जला एकादशी से मिलने वाले शुभ फल

धार्मिक फल

  • विष्णु लोक की प्राप्ति।
  • पापों से मुक्ति।
  • आध्यात्मिक उन्नति।

सांसारिक फल

  • धन और वैभव में वृद्धि।
  • परिवार में सुख-शांति।
  • कार्यों में सफलता।

निष्कर्ष

निर्जला एकादशी भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत पवित्र अवसर है। विधिपूर्वक व्रत, पूजा, मंत्र जाप और दान करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया निर्जला एकादशी व्रत व्यक्ति के जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है।

ज्योतिषाचार्य राममेहर शर्मा के अनुसार, निर्जला एकादशी केवल एक धार्मिक व्रत नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जागरण का पर्व है। इस दिन श्रद्धा, संयम और भक्ति के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। यदि स्वास्थ्य कारणों से पूर्ण निर्जला व्रत संभव न हो, तो गुरुजनों की सलाह लेकर फलाहार के साथ भी व्रत किया जा सकता है।

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