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निर्जला एकादशी : तप, श्रद्धा और अनंत ज्ञान का पावन पर्व

By May 21, 2026 Blog

“ज्योतिष आचार्य राममेहर शर्मा”

सनातन धर्म में निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ और पुण्यदायी माना गया है। यह पर्व केवल व्रत और उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मसंयम, आध्यात्मिक जागृति और अनंत ज्ञान प्राप्त करने का दिव्य अवसर भी है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत करने से वर्ष भर की सभी एकादशियों का फल प्राप्त होता है तथा भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनी रहती है।

ज्योतिष आचार्य राममेहर शर्मा जी के अनुसार, “निर्जला एकादशी केवल शरीर को तपाने का व्रत नहीं, बल्कि मन, विचार और आत्मा को शुद्ध करने का मार्ग है। जब व्यक्ति अपने इंद्रियों पर नियंत्रण करना सीखता है, तभी उसके जीवन में सच्चे ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।”

निर्जला एकादशी हमें संयम और धैर्य का महत्व सिखाती है। आज के समय में व्यक्ति भौतिक सुखों की चाह में मानसिक शांति खो रहा है। ऐसे में यह पावन पर्व हमें यह संदेश देता है कि वास्तविक शक्ति बाहरी सुखों में नहीं, बल्कि आत्मबल और आध्यात्मिक चेतना में छिपी होती है।

हिंदू धर्म में जल को जीवन का आधार माना गया है और निर्जला व्रत में जल का त्याग आत्मनियंत्रण का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। यह व्रत हमें अपने मन की इच्छाओं पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देता है। जब मन शांत और नियंत्रित होता है, तभी व्यक्ति सही निर्णय लेने और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने में सक्षम बनता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप, दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सेवा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इस दिन किए गए शुभ कार्य कई गुना फल प्रदान करते हैं और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

ज्योतिष आचार्य राममेहर शर्मा जी बताते हैं कि निर्जला एकादशी केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति का महापर्व है। यह हमें सिखाती है कि सच्चा ज्ञान वही है, जो मनुष्य को विनम्रता, सेवा और सकारात्मकता के मार्ग पर चलना सिखाए।

आइए, इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु से प्रार्थना करें कि वे सभी के जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और अनंत ज्ञान का प्रकाश फैलाएँ।

निर्जला एकादशी की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।— ज्योतिष आचार्य राममेहर शर्मा

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