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चैत्र मास में क्या नहीं करना चाहिए?

By March 23, 2026 Famous Astrologer

हिंदू धर्म में विवाह केवल सामाजिक संबंध नहीं बल्कि एक पवित्र संस्कार माना जाता है। विवाह के लिए शुभ समय, तिथि, नक्षत्र और ग्रह स्थिति का विचैत्र मास केवल एक धार्मिक महीना नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का अवसर है। इस दौरान संयम, सात्विकता, अनुशासन और श्रद्धा का पालन करना चाहिए। ज्योतिषाचार्य राममेहर शर्मा के अनुसार, अगर हम बताए गए “क्या न करें” नियमों का ध्यान रखें, तो जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और सफलता प्राप्त होती है।

इस पवित्र समय में अच्छे विचार, अच्छे कर्म और ईश्वर भक्ति से व्यक्ति अपने जीवन को नई दिशा दे सकता है, जैसा कि ज्योतिषाचार्य राममेहर शर्मा भी बताते हैं।

1. तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए

  • मांस, मछली, अंडा, शराब, लहसुन और प्याज से परहेज करें
  • तामसिक भोजन से आलस्य, क्रोध और नकारात्मकता बढ़ती है
  • सात्विक आहार अपनाएं:
    • फल
    • दूध और दही
    • हरी सब्जियां
    • अनाज
  • इससे शरीर शुद्ध और मन शांत रहता है

2. क्रोध, विवाद और कटु वचन से बचें

  • मानसिक शांति बनाए रखें
  • झगड़ा और अपशब्द रिश्तों को खराब करते हैं
  • नकारात्मक कर्मों से बचें
  • मधुर वाणी और धैर्य अपनाएं

3. झूठ बोलना और छल-कपट करना वर्जित है

  • सत्य का पालन करें
  • झूठ, धोखा और किसी का हक मारना पाप है
  • कर्मों का प्रभाव पूरे साल पर पड़ता है

4. चैत्र नवरात्रि के दौरान बाल और नाखून काटने से बचें

  • नवरात्रि के 9 दिनों में बाल और नाखून न काटें
  • यह देवी साधना का समय होता है
  • शरीर को प्राकृतिक रूप में बनाए रखें
  • इससे एकाग्रता बढ़ती है

5. घर में गंदगी और अव्यवस्था नहीं रखनी चाहिए

  • घर को साफ और व्यवस्थित रखें
  • स्वच्छता से सकारात्मक ऊर्जा आती है
  • गंदगी से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है
  • देवी-देवताओं का वास स्वच्छ स्थान पर होता है

6. ब्रह्मचर्य का पालन न करना

  • ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • मानसिक और शारीरिक ऊर्जा का संरक्षण करें
  • इंद्रियों पर नियंत्रण रखें
  • साधना और ध्यान में सफलता मिलती है

7. पूजा-पाठ और व्रत में लापरवाही नहीं करनी चाहिए

  • नियमित पूजा और मंत्र जाप करें
  • व्रत को नियमपूर्वक पूरा करें
  • ध्यान और भक्ति में निरंतरता रखें
  • लापरवाही से पूर्ण फल नहीं मिलता

8. बड़ों, गुरुओं और महिलाओं का अपमान न करें

  • सम्मान और विनम्रता बनाए रखें
  • माता-पिता और गुरु का आदर करें
  • महिलाओं का सम्मान करें
  • अपमान से पाप और बाधाएं आती हैं

9. पेड़-पौधों और प्रकृति को नुकसान न पहुंचाएं

  • पेड़-पौधों को काटने से बचें
  • प्रकृति का संरक्षण करें
  • पौधे लगाना शुभ होता है
  • देखभाल से सकारात्मक फल मिलता है

10. आलस्य और नकारात्मक सोच से दूर रहें

  • नई शुरुआत के लिए सक्रिय रहें
  • देर तक सोने और टालमटोल से बचें
  • सकारात्मक सोच अपनाएं
  • निराशा से दूर रहे

11. दान-पुण्य से दूरी न बनाएं

  • जरूरतमंदों की सहायता करें
  • दान के प्रकार:
    • अन्न
    • वस्त्र
    • जल
    • धन
  • दान से कई गुना पुण्य मिलता है

12. अशुद्ध और अपवित्र स्थानों से दूर रहें

  • मंदिर और घर को पवित्र रखें
  • गंदी जगहों से बचें
  • नकारात्मक वातावरण से दूर रहें
  • अच्छी संगति अपनाएं

13. नशा और गलत आदतों से बचें

  • शराब, तंबाकू, गुटखा आदि का त्याग करें
  • ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं
  • आध्यात्मिक प्रगति में बाधा डालते हैं

14. किसी का दिल न दुखाएं

  • किसी के साथ बुरा व्यवहार न करें
  • अपमान और दुख देने से बचें
  • दूसरों की मदद करें
  • प्रेम और करुणा से व्यवहार करें

15. धार्मिक नियमों की अवहेलना न करें

  • व्रत और पूजा के नियमों का पालन करें
  • अनुशासन बनाए रखें
  • नियमों की अनदेखी से पूर्ण लाभ नहीं मिलता

निष्कर्ष

चैत्र मास केवल एक धार्मिक महीना नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का अवसर है। ज्योतिषाचार्य राममेहर शर्मा के अनुसार, इस दौरान संयम, सात्विकता, अनुशासन और श्रद्धा का पालन करना चाहिए। अगर हम बताए गए “क्या न करें” नियमों का ध्यान रखें, तो जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और सफलता प्राप्त होती है।

इस पवित्र समय में अच्छे विचार, अच्छे कर्म और ईश्वर भक्ति से व्यक्ति अपने जीवन को नई दिशा दे सकता है—ऐसा भी ज्योतिषाचार्य राममेहर शर्मा का मानना है।

अधिक जानकारी और परामर्श के लिए विजिट करें: ANANT GYAN

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