
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण (सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण) को अत्यंत महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना गया है। यह केवल खगोलीय दृष्टिकोण से ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है।
ग्रहण क्या है?
जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं तो ग्रहण की स्थिति बनती है।
सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और सूर्य का प्रकाश आंशिक या पूर्ण रूप से ढक जाता है।
चंद्र ग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आकर चंद्रमा पर अपनी छाया डालती है।
ग्रहण का जीवन पर प्रभाव
मानसिक स्थिति पर प्रभाव – ग्रहण के समय मानसिक अस्थिरता और बेचैनी बढ़ सकती है। व्यक्ति को तनाव और नकारात्मक विचारों का अनुभव हो सकता है।
स्वास्थ्य पर प्रभाव – आयुर्वेद और ज्योतिष के अनुसार ग्रहण के दौरान शरीर की ऊर्जा असंतुलित हो सकती है। गर्भवती महिलाओं को इस समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
आध्यात्मिक प्रभाव – ग्रहण का समय साधना, जप और ध्यान के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस समय किया गया मंत्र जाप कई गुना अधिक फल देता है।
धन और कार्यक्षेत्र पर प्रभाव – कई बार ग्रहण के बाद आर्थिक लेन-देन या कार्यक्षेत्र में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
गृहस्थ जीवन पर प्रभाव – दाम्पत्य संबंधों और पारिवारिक जीवन में तनाव की संभावना बढ़ जाती है।
ग्रहण से बचाव और उपाय
ग्रहण काल में भोजन, जल और नकारात्मक कार्यों से बचना चाहिए।
इस समय “ॐ नमः शिवाय” या “गायत्री मंत्र” का जाप करना शुभ माना जाता है।
ग्रहण के बाद स्नान करना और घर में गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए।
ग्रहण समाप्ति के बाद गरीब और जरूरतमंदों को दान करना शुभ फलदायी होता है।
गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के समय घर के भीतर रहना चाहिए और तीक्ष्ण वस्तुओं के प्रयोग से बचना चाहिए।
निष्कर्ष
ग्रहण जीवन में कई प्रकार के मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक प्रभाव डालता है। यदि इस समय सही उपाय और सावधानियों का पालन किया जाए तो नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सकता है और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।
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