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दिवाली 2026: तारीख और शुभ मुहूर्त से लक्ष्मी-गणेश पूजा तक संपूर्ण मार्गदर्शिका

By October 29, 2026 Blog

दिवाली की पूजा शुरू होने वाली हो और तभी पता चले कि बाती तैयार नहीं है, कलश कहां रखना है यह स्पष्ट नहीं है या लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की जगह को लेकर उलझन हैऐसी स्थिति कई घरों में बन जाती है। इसकी वजह अक्सर सामग्री की कमी से ज्यादा पूजा के क्रम की जानकारी न होना होता है।

एक अच्छी तैयारी में तीन बातें शामिल हैं: अपने शहर का सही पूजा समय जानना, आवश्यक सामग्री पहले जुटाना और परिवार में प्रचलित विधि समझ लेना। इसके बाद पूजा को अनावश्यक रूप से जटिल बनाने की जरूरत नहीं रहती।

दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर को मनाई जाएगी। नई दिल्ली में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त शाम 5:54 बजे से 7:50 बजे तक है। नीचे दिए समय नई दिल्ली के लिए हैं। अन्य शहरों में पूजा करने वाले अपने स्थान का पंचांग देखें।

यह लेख घर पर सामान्य लक्ष्मी-गणेश पूजन की तैयारी समझाता है। विस्तृत वैदिक अनुष्ठान, कुल-परंपरा और क्षेत्रीय रीति के लिए अपने पुरोहित या परिवार के जानकार सदस्य का मार्गदर्शन लें।

दिवाली 2026 की तारीख और लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त

दिवाली का मुख्य लक्ष्मी पूजन अमावस्या की शाम किया जाता है। इस वर्ष अमावस्या दो तारीखों में पड़ रही है, इसलिए केवल तिथि समाप्त होने की तारीख देखकर त्योहार का दिन तय करना सही नहीं होगा।

विवरणनई दिल्ली के लिए तारीख और समय
दिवाली और मुख्य लक्ष्मी पूजनरविवार, 8 नवंबर 2026
अमावस्या तिथि शुरू8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्तशाम 5:54 से 7:50 बजे
मुहूर्त की अवधि1 घंटा 56 मिनट
प्रदोष कालशाम 5:31 से रात 8:09 बजे
वृषभ कालशाम 5:54 से 7:50 बजे

दिवाली 8 नवंबर को क्यों है, जबकि अमावस्या 9 नवंबर तक है?

त्योहार का निर्णय केवल इस आधार पर नहीं होता कि तिथि किस दिन समाप्त हो रही है। लक्ष्मी पूजा में अमावस्या की शाम और पूजा के लिए उपयुक्त काल देखा जाता है। नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार यह संयोग 8 नवंबर की शाम को उपलब्ध है।

पूजा का समय देखते हुए वर्ष, शहर और अनुष्ठान का नाम जरूर जांचें। धनतेरस की खरीदारी का समय, दिवाली का लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और किसी व्यवसाय की अलग पूजा का समय एक ही बात नहीं हैं।

लक्ष्मी-गणेश पूजा का भाव क्या है?

हिंदू धार्मिक परंपरा में माता लक्ष्मी को समृद्धि और सौभाग्य से तथा भगवान गणेश को बुद्धि और शुभ आरंभ से जोड़ा जाता है। उनका संयुक्त पूजन जीवन में साधनों के साथ विवेक की कामना का अवसर है।

समृद्धि का अर्थ केवल धन संचय तक सीमित नहीं रखा जाता। परिवार में सहयोग, काम के प्रति ईमानदारी, संसाधनों का सम्मान और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता भी इस पर्व के भाव से जुड़ सकती है।

कुछ परिवारों में लक्ष्मी-गणेश के साथ मां सरस्वती, भगवान कुबेर, बही-खातों और व्यापारिक लेखनी का पूजन भी होता है। इन रीति-रिवाजों को सभी घरों के लिए अनिवार्य न समझें।

दिवाली पूजा सामग्री लिस्ट: जरूरी और परंपरागत वस्तुएं

पूजा की खरीदारी करने से पहले घर में उपलब्ध सामान देख लें। कई वस्तुएं पहले से मौजूद होती हैं और उन्हें साफ करके इस्तेमाल किया जा सकता है।

सामान्य घरेलू पूजन की सामग्री

सामग्रीतैयारी कैसे करें?
लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या चित्रसाफ और स्थिर स्थान पर रखें
चौकी और साफ कपड़ामूर्तियां रखने के लिए पर्याप्त जगह हो
रोली या कुमकुम, अक्षत और चंदनछोटी अलग कटोरियों में रखें
फूल और मालापूजन से पहले तैयार कर लें
दीपक और रुई की बातीदीपक स्थिर हो और उसमें दरार न हो
घी या तेलअपनी परंपरा के अनुसार चुनें
जल का पात्र और चम्मचसाफ पात्र इस्तेमाल करें
धूप या अगरबत्तीसुरक्षित स्टैंड साथ रखें
फल और मिठाईभोग के लिए अलग साफ पात्र में रखें
आरती की थालीआसानी से संभाली जा सके

परिवार की रीति के अनुसार अतिरिक्त सामग्री

  • कलश, पत्ते और नारियल।
  • मौली, चुनरी या छोटे वस्त्र।
  • गणेश जी के लिए दूर्वा।
  • खील, बताशे और अन्य पारंपरिक प्रसाद।
  • पान, सुपारी और इलायची।
  • सिक्के या मुद्रा।
  • बही-खाता और लेखनी।
  • उपयुक्त मूर्ति के अभिषेक के लिए पंचामृत।

सामग्री की लंबी सूची देखकर हर वस्तु खरीदना जरूरी नहीं है। घर की पूजा और किसी विस्तृत अनुष्ठान की आवश्यकताएं अलग हो सकती हैं।

दिवाली की तैयारी किस क्रम में करें?

पूजा के दिन काम कम करने का सबसे आसान तरीका है कि तैयारी को समय के अनुसार बांट लिया जाए।

एक दिन पहले

पूजा सामग्री की सूची पूरी करें। चौकी, थाली और पात्र साफ कर लें। परिवार में कौन भोग तैयार करेगा और कौन सजावट संभालेगा, यह तय कर लें।

यदि किसी पाठ या आरती का उपयोग करना है, तो उसकी पुस्तक निकालकर रख दें। पूजा के बीच मोबाइल पर अलग-अलग विधियां खोजने से क्रम को लेकर भ्रम बढ़ सकता है।

पूजा वाले दिन दोपहर तक

पूजा स्थल साफ करें, कपड़ा बिछाएं और सामग्री व्यवस्थित करें। भोग तैयार करते समय प्रसाद के पात्र अलग रखें। फूल, बाती और जल की व्यवस्था भी पहले कर लें।

मुहूर्त शुरू होने से पहले

परिवार के सभी सदस्यों को समय बता दें। चौकी के पास भीड़ न हो और आरती के लिए पर्याप्त जगह रहे। पूजा शुरू होने के बाद बार-बार उठना न पड़े, इसके लिए जरूरी सामान हाथ की पहुंच में रखें।

लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति कैसे रखें?

मूर्ति स्थापना को लेकर सबसे ज्यादा उलझन दिशा और दाएं-बाएं स्थान की होती है। इसे समझने से पहले यह देखें कि आपके घर में पहले से स्थापित मंदिर है या दिवाली के लिए अस्थायी चौकी लगाई जा रही है।

चौकी कहां लगाएं?

साफ, शांत और सुरक्षित स्थान चुनें। चौकी समतल हो और उसके ऊपर रखी मूर्तियां स्थिर रहें। दीपक के पास पर्दे, कागज की झालर या खुले बिजली के तार न हों।

दिशा का पालन करने की पारिवारिक परंपरा हो, तो उसी के अनुसार व्यवस्था करें। केवल दिशा के लिए पूजा को ऐसी जगह न रखें जहां बैठना या दीपक संभालना मुश्किल हो।

लक्ष्मी जी दाईं ओर रहेंगी या बाईं ओर?

इस प्रश्न का उत्तर देते समय देखने वाले की दिशा स्पष्ट होना जरूरी है। मूर्ति की अपनी दाईं ओर और सामने बैठे व्यक्ति की दाईं ओर अलग होती है। इसी कारण अलग-अलग तस्वीरें उलटी लग सकती हैं।

स्थापना से पहले परिवार के पुरोहित या जानकार सदस्य से स्थान स्पष्ट कर लें। संयुक्त चित्र या पहले से स्थापित प्रतिमा हो, तो उसकी प्रचलित व्यवस्था अपनाएं।

क्या नई मूर्ति लेना जरूरी है?

कुछ परिवार हर वर्ष नई मिट्टी की मूर्तियां लाते हैं। अन्य परिवार स्थायी धातु की प्रतिमाओं का पूजन करते हैं। दोनों स्थितियों में अपने घर की रीति समझना अधिक उपयोगी है।

मूर्ति खरीदते समय यह भी देखें कि उसकी सामग्री क्या है। रंग लगी मिट्टी या प्लास्टर की प्रतिमा पर जल डालने से वह खराब हो सकती है।

दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा कैसे करें?

नीचे सामान्य घरेलू पूजन का सरल क्रम दिया गया है। आपके परिवार की विधि में कुछ चरण आगे-पीछे हो सकते हैं।

1. स्वच्छ होकर पूजा के लिए बैठें

स्नान करके साफ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल पर बैठने के बाद सामग्री की अंतिम जांच कर लें। सुरक्षित स्थान पर दीपक जलाएं और मन को पूजा पर केंद्रित करें।

2. संकल्प करें

अपना नाम और पूजा का उद्देश्य स्मरण करें। सरल भाषा में परिवार की शांति, सद्बुद्धि और उचित प्रयासों से समृद्धि की प्रार्थना कर सकते हैं।

औपचारिक संकल्प का पाठ नहीं आता हो, तो उसे अधूरा पढ़ने के बजाय पुरोहित से समझें या अपनी परंपरा के अनुसार सरल संकल्प लें।

3. कलश स्थापना करें

यदि घर में कलश रखने की रीति है, तो साफ पात्र में जल भरकर निर्धारित स्थान पर रखें। पत्ते और नारियल रखने की प्रक्रिया अपनी परंपरा के अनुसार पूरी करें।

कलश को चौकी के बिल्कुल किनारे न रखें। आसपास इतनी जगह हो कि पूजा करते समय हाथ लगने से वह गिरे नहीं।

4. भगवान गणेश का पूजन करें

गणेश जी का स्मरण करके रोली या चंदन, अक्षत और फूल अर्पित करें। घर की रीति के अनुसार दूर्वा और मिठाई चढ़ाएं।

प्रार्थना में शुभ कार्य के लिए बुद्धि, धैर्य और सही निर्णय की कामना करें।

5. माता लक्ष्मी का पूजन करें

माता लक्ष्मी का ध्यान करके पूजा स्वीकार करने की प्रार्थना करें। फूल, तिलक, वस्त्र या चुनरी तथा अन्य सामग्री अपनी परंपरा के अनुसार अर्पित करें।

यदि उपयुक्त धातु की प्रतिमा पर अभिषेक किया जाता है, तो उसके लिए अलग पात्र रखें। कागज के चित्र और पानी से खराब होने वाली मूर्ति पर अभिषेक न करें।

6. धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें

धूप या अगरबत्ती सुरक्षित पात्र में रखें। दीप दिखाएं और तैयार भोग अर्पित करें। सभी खाद्य पदार्थ खुले में फैलाने के बजाय साफ थालियों में रखें।

पूजा के दौरान भोग के पास कपूर, तेल या अन्य गैर-खाद्य सामग्री न रखें।

7. परंपरा हो तो बही-खाता और कुबेर पूजन करें

व्यवसाय से जुड़े परिवार बही-खाते और लेखनी का पूजन कर सकते हैं। यदि कुबेर पूजन की रीति है, तो उसका निर्धारित पाठ और क्रम अपनाएं।

सांकेतिक पूजन के लिए मूल्यवान वस्तुओं या संवेदनशील दस्तावेजों को लंबे समय तक खुला रखना आवश्यक नहीं है।

8. मंत्र, आरती और क्षमा-प्रार्थना करें

परिवार में प्रचलित मंत्र और आरती पढ़ें। इसके बाद पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें और सभी के कल्याण की प्रार्थना करें।

प्रसाद बांटने से पहले दीपक और धूप की स्थिति देख लें, खासकर यदि बच्चे आरती में शामिल हों।

दिवाली पूजा के सरल मंत्र

मंत्र का पाठ शांत गति से और समझकर करें। जल्दी-जल्दी अधिक संख्या पूरी करने का दबाव न रखें।

गणेश जी का नाम-मंत्र:

ॐ गं गणपतये नमः।

माता लक्ष्मी का नाम-मंत्र:

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

यदि परिवार में श्रीसूक्त, लक्ष्मी स्तुति या कोई विशेष पाठ होता है, तो उसका अनुसरण कर सकते हैं। पहली बार विस्तृत पाठ करने से पहले उच्चारण और क्रम समझ लें।

मंत्रों को निश्चित धनलाभ का वादा मानकर न पढ़ें। पूजन धार्मिक आस्था और प्रार्थना का विषय है।

लक्ष्मी-गणेश को क्या भोग लगाएं?

भोग चुनते समय तीन बातें देखेंघर की परंपरा, खाद्य पदार्थ की ताजगी और परिवार की आवश्यकता।

विभिन्न परिवारों में फल, मिठाई, खील-बताशे, लड्डू या मोदक रखे जाते हैं। किसी दूसरे घर की थाली देखकर अपनी व्यवस्था को अधूरा न मानें।

घर का प्रसाद बनाते समय:

  • साफ बर्तन और ताजी सामग्री इस्तेमाल करें।
  • भोग की मात्रा इतनी रखें कि बाद में उपयोग हो सके।
  • दूध की मिठाई को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक बाहर न रखें।
  • जिन लोगों को किसी खाद्य सामग्री से एलर्जी है, उन्हें प्रसाद की सामग्री बता दें।

दिवाली पर दीपक कहां और कितने रखें?

दीपकों की संख्या अलग-अलग परंपराओं में बदलती है। सभी घरों के लिए एक निश्चित संख्या बताना उचित नहीं होगा।

पूजा स्थान, प्रवेश द्वार और आंगन में अपनी रीति के अनुसार दीप रख सकते हैं। जगह चुनते समय सजावट से अधिक सुरक्षा देखें।

दीपक रखने की उपयोगी सावधानियां:

  • उसे समतल और गर्मी सहने वाली सतह पर रखें।
  • पर्दों और कागज की सजावट से दूरी रखें।
  • आने-जाने की सीढ़ियों और रास्ते के बीच न रखें।
  • बच्चों और पालतू पशुओं की पहुंच का ध्यान रखें।
  • बिना निगरानी के जलता दीपक न छोड़ें।

यदि परिवार में रातभर दीप जलाने की रीति है, तो उसकी निगरानी का प्रबंध भी करें।

क्या दिवाली पर व्रत रखना अनिवार्य है?

दिवाली पर उपवास की परंपरा कुछ घरों में है, लेकिन सभी परिवारों में एक जैसी नहीं होती। पूजा और व्रत के स्वरूप को अपनी पारिवारिक रीति तथा व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार समझें।

निर्जला उपवास को सभी के लिए जरूरी न मानें। भोजन या दवाओं से जुड़ी कोई व्यक्तिगत जरूरत हो, तो उपवास का निर्णय डॉक्टर की सलाह से लें।

पूजा के बाद सामग्री कैसे समेटें?

पूजा पूरी होने के बाद सामग्री को अगले दिन तक बिखरा छोड़ने के बजाय व्यवस्थित कर दें।

प्रसाद बांटें और बचा हुआ खाद्य पदार्थ उचित तरीके से रखें। बही-खाते, सिक्के और लेखनी सुरक्षित स्थान पर रख दें। फूल और जैविक सामग्री अलग करें तथा प्लास्टिक या सजावटी अवशेष अलग रखें।

स्थायी प्रतिमाओं को मंदिर में व्यवस्थित करें। अस्थायी मूर्तियों के लिए स्थानीय पर्यावरण-अनुकूल व्यवस्था अपनाएं। गैर-जैविक सामग्री जलस्रोतों में न डालें।

पहली बार पूजा कर रहे हैं तो इन गलतियों से बचें

अलग-अलग विधियों को एक साथ मिलाना

कई वीडियो और लेख देखकर हर चरण जोड़ने से पूजा जटिल हो सकती है। पहले एक विश्वसनीय विधि और अपनी पारिवारिक परंपरा समझें।

सामग्री खरीदने को ही पूरी तैयारी मान लेना

पूजा में कौन-सी वस्तु कब इस्तेमाल होगी, यह जानना भी जरूरी है। थाली में सब कुछ रख देने से क्रम अपने आप स्पष्ट नहीं होता।

मुहूर्त के समय सजावट करना

मूर्ति स्थापना, भोग और सामग्री पहले तैयार रखें। निर्धारित समय मुख्य पूजन के लिए उपलब्ध रहे।

मान्यताओं से डर पैदा करना

कोई सामग्री छूट जाने या किसी चरण में भूल होने को निश्चित अनिष्ट से न जोड़ें। संदेह हो तो शांत मन से जानकार व्यक्ति से पूछें।

व्यक्तिगत प्रश्नों के लिए Anant Gyan से मार्गदर्शन

दिवाली के सामान्य पूजा समय के लिए स्थानीय पंचांग देखें और घर की विधि के लिए अपनी पारिवारिक परंपरा समझें। व्यक्तिगत कुंडली से जुड़े प्रश्न सामान्य त्योहार की जानकारी से अलग होते हैं।

Anant Gyan में ज्योतिष आचार्य राममेहर शर्मा से व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श लेते समय अपने प्रश्न स्पष्ट रखें। यदि जन्मकुंडली पर चर्चा करनी है, तो जन्म तारीख, समय और स्थान की उपलब्ध जानकारी तैयार रखें।

दिवाली 2026 से जुड़े सामान्य सवाल

1. दिवाली 2026 किस दिन है?

मुख्य दिवाली और लक्ष्मी पूजा रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। अपने शहर के पूजा समय की अलग पुष्टि करें।

2. नई दिल्ली में लक्ष्मी पूजा कितने बजे करें?

नई दिल्ली के लिए पूजा का मुहूर्त शाम 5:54 बजे से 7:50 बजे तक है।

3. क्या पूजा का पूरा अनुष्ठान मुहूर्त में समाप्त करना जरूरी है?

सामग्री की तैयारी और प्रारंभिक व्यवस्था पहले कर सकते हैं। मुख्य लक्ष्मी पूजन निर्धारित मुहूर्त में रखने के लिए विस्तृत क्रम पुरोहित से तय करें।

4. क्या बिना पंडित के लक्ष्मी-गणेश पूजा कर सकते हैं?

घर में प्रचलित सरल पूजन विधि के अनुसार पूजा कर सकते हैं। विस्तृत अनुष्ठान या अपरिचित प्रक्रिया के लिए मार्गदर्शन लेना उपयोगी है।

5. क्या पूजा में नई मूर्ति ही रखनी चाहिए?

यह पारिवारिक परंपरा पर निर्भर है। स्थायी प्रतिमाओं की पूजा वाले घरों और हर वर्ष नई प्रतिमा लाने वाले घरों की रीति अलग हो सकती है।

6. क्या महंगी सामग्री के बिना पूजा हो सकती है?

सामान्य घरेलू पूजा के लिए अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार तैयारी करें। महंगी सजावट या बड़ी मात्रा में सामग्री जुटाना आवश्यक लक्ष्य नहीं है।

7. पूजा का समय निकल जाए तो क्या करें?

घबराएं नहीं। उसी दिन के उपलब्ध समय के लिए स्थानीय पुरोहित से मार्गदर्शन लें। इसे अपने आप किसी अशुभ घटना का संकेत न समझें।

8. क्या पूजा के बाद घर का दरवाजा पूरी रात खुला रखना जरूरी है?

आस्था से जुड़ी मान्यताओं के कारण घर की सुरक्षा से समझौता न करें। प्रवेश द्वार की सजावट और दीपदान सुरक्षित तरीके से करें तथा दरवाजे अपनी सुरक्षा व्यवस्था के अनुसार रखें।

निष्कर्ष

दिवाली की व्यवस्थित पूजा के लिए सबसे जरूरी हैसही स्थानीय समय, पहले से तैयार सामग्री और समझा हुआ पूजा क्रम। हर नई मान्यता अपनाने के बजाय अपनी परंपरा को जानें और उसी के अनुसार लक्ष्मी-गणेश पूजन करें।

पूजा के साथ परिवार का सहयोग, प्रसाद साझा करना और सुरक्षित दीपदान भी उत्सव का हिस्सा बनाएं। Anant Gyan की ओर से आपको और आपके परिवार को दीपावली की शुभकामनाएं।

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