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नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने के नियम: क्या करें और क्या ध्यान रखें?

By October 10, 2026 Blog
नवरात्रि पूजा में मां दुर्गा के सामने प्रज्वलित अखंड ज्योति

नवरात्रि की पूजा के लिए चौकी सज गई है, कलश की सामग्री तैयार है और अब देवी के सामने अखंड ज्योति रखने का विचार है। दीपक जलाने से पहले एक बात तय कर लें क्या घर में उसकी लगातार देखभाल हो सकेगी?

अखंड ज्योति का अर्थ है अपने धार्मिक संकल्प की अवधि तक दीपक को प्रज्वलित रखना। इसलिए इसकी तैयारी में घी, तेल और बाती के साथ परिवार की दिनचर्या भी शामिल होती है। दिन में पूजा कौन करेगा, रात में दीपक कौन देखेगा और बाहर जाने पर घर में कौन रहेगाइन सवालों के जवाब पहले होने चाहिए।

श्रद्धा के साथ की गई व्यवस्थित तैयारी आपको पूजा के दौरान बार-बार होने वाली परेशानी से बचाती है।

अखंड ज्योति का संकल्प कब लें?

कुछ परिवारों में हर नवरात्रि अखंड ज्योति रखने की परंपरा होती है। कुछ श्रद्धालु पहली बार इसका संकल्प लेते हैं। दोनों स्थितियों में पूजा की अवधि और समापन का क्रम स्पष्ट होना चाहिए।

“नौ दिन दीपक जलाना है” कहने से पूरी विधि स्पष्ट नहीं होती। आपके अनुष्ठान में ज्योति कब प्रज्वलित होगी, अंतिम पूजा कब होगी और उसके बाद क्या करना है यह अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार समझें।

अखंड ज्योति, व्रत और दुर्गा सप्तशती का पाठ अलग-अलग संकल्प हैं। किसी एक को अपनाने पर बाकी सभी अपने आप अनिवार्य नहीं हो जाते।

यदि पहली बार यह संकल्प ले रहे हैं, तो अपनी दिनचर्या बताकर धार्मिक मार्गदर्शन लें। Anant Gyan में ज्योतिष आचार्य राममेहर शर्मा से संपर्क करके संकल्प और पूजा के क्रम पर उपलब्ध मार्गदर्शन की जानकारी ले सकते हैं। बात करते समय यह जरूर बताएं कि घर में निरंतर देखभाल की व्यवस्था कैसी है।

सुंदर दीपक से ज्यादा जरूरी है सही दीपक

पूजा के लिए दीपक खरीदते समय अक्सर उसका डिजाइन पहले देखा जाता है। अखंड ज्योति के लिए उसकी मजबूती और उपयोग की सुविधा अधिक मायने रखती है।

दीपक का आधार चौड़ा और स्थिर हो। पात्र में दरार न हो और घी या तेल बाहर न रिसे। उसमें इतनी क्षमता हो कि बार-बार बहुत पास जाकर भरने की जरूरत न पड़े।

मिट्टी या धातु के दीपक का चुनाव अपनी परंपरा के अनुसार कर सकते हैं। मिट्टी का पात्र है तो उसकी स्थिति पहले जांचें। धातु का दीपक गर्म हो सकता है, इसलिए उसे ऐसी जगह रखें जहां जलते समय उठाना न पड़े।

दीपक के नीचे चौड़ी अग्निरोधी थाली रखें। इससे थोड़ी मात्रा में छलका घी या तेल आसपास फैलने से रोका जा सकता है। लेकिन थाली रखने के बाद भी रिसते हुए दीपक का इस्तेमाल जारी न रखें।

घी या तेल: किसे चुनें?

इस प्रश्न पर सभी घरों की एक जैसी परंपरा नहीं है। कहीं घी की ज्योति रखी जाती है और कहीं तेल का दीपक जलाया जाता है।

अपने परिवार में जो विधि अपनाई जाती है, उसे पहले समझें। इंटरनेट पर दो अलग निर्देश मिलने पर दोनों को मिलाकर नया नियम बनाने की जरूरत नहीं है।

व्यावहारिक तैयारी में इन बातों का ध्यान रखें:

  • पूरे संकल्प के लिए पर्याप्त घी या तेल उपलब्ध हो।
  • उसे साफ, बंद पात्र में रखें।
  • भरने के लिए सुविधाजनक छोटा बर्तन रखें।
  • उसमें पानी, इत्र या दूसरी सामग्री न मिलाएं।
  • सजावटी लैंप का ईंधन पूजा के दीपक में इस्तेमाल न करें।

पूजा के बीच घी से तेल या तेल से घी बदलने की धार्मिक स्थिति स्पष्ट न हो तो पहले पूछें। केवल उपलब्धता के आधार पर अनुमान लगाने से बचें।

बाती की छोटी गलती से बार-बार परेशानी हो सकती है

बाती बहुत लंबी बाहर निकली हो तो लौ बड़ी हो सकती है। बहुत कम हिस्सा बाहर हो या उसमें घी अथवा तेल ठीक से न पहुंच रहा हो तो लौ कमजोर पड़ सकती है।

अच्छी सूती बाती लें और उसे अपने दीपक के अनुसार व्यवस्थित करें। अतिरिक्त बातियां पास रखें, लेकिन दीपक से सुरक्षित दूरी पर।

जलती बाती को हाथ से खींचने, गर्म पात्र को पकड़ने या लौ के ऊपर झुकने से बचें। लौ को ठीक करने के लिए खुद को जलने के खतरे में न डालें।

बाती बदलने का धार्मिक क्रम और सुरक्षित तरीका पहले समझ लेना उपयोगी है, खासकर जब आप पहली बार अखंड ज्योति रख रहे हों।

पूजा की चौकी पर दीपक कहां रखें?

चौकी सजाते समय दीपक के लिए अंत में बची हुई जगह चुनना ठीक नहीं है। पहले उसका सुरक्षित स्थान तय करें, फिर आसपास सजावट करें।

पास में चुनरी, कागज, पर्दे, सूखे पुष्प या लटकती माला न हो। आरती करते समय हाथ या कपड़ा दीपक से न टकराए। बच्चों तथा पालतू पशुओं की पहुंच रोकने की व्यवस्था रखें।

पंखे या खिड़की की सीधी हवा से लौ प्रभावित हो सकती है। लेकिन हवा रोकने के लिए दीपक को सामान्य कांच के डिब्बे, बंद अलमारी या छोटी बंद जगह में न रखें।

धार्मिक दिशा तय करते समय भी स्थान की सुरक्षा बनी रहनी चाहिए। आपके घर की पूजा में दीपक की कोई निश्चित दिशा है तो ऐसी व्यवस्था बनाएं जिसमें दोनों बातों का ध्यान रखा जा सके।

दिन में सब घर पर हैं, लेकिन रात का क्या?

अखंड ज्योति की सबसे ज्यादा अनदेखी होने वाली तैयारी रात की देखभाल है। दिन में आते-जाते दीपक दिख जाता है; रात के लिए जिम्मेदारी स्पष्ट करनी पड़ती है।

परिवार में पहले तय करें कि कौन निगरानी करेगा और जिम्मेदारी कैसे बदलेगी। घी या तेल कब भरा गया है, यह दूसरे व्यक्ति को बताएं।

सिर्फ कैमरा लगा देना या मोबाइल में अलार्म लगा लेना पूरी व्यवस्था नहीं है। जलते दीपक की सुरक्षित देखभाल के लिए जिम्मेदार वयस्क की मौजूदगी जरूरी है।

घर के सभी सदस्य बाहर जाने वाले हों तो ज्योति अकेली छोड़कर न निकलें। ऐसी परिस्थिति पहले से मालूम हो, तो संकल्प लेने से पहले अपनी पूजा के लिए उपयुक्त विकल्प समझें।

घी या तेल भरते समय जल्दबाजी न करें

दीपक का ईंधन खत्म होने के बिल्कुल करीब पहुंचने का इंतजार न करें। उसकी स्थिति नियमित देखें और जरूरत के अनुसार नियंत्रित मात्रा भरें।

बड़े डिब्बे से सीधे डालने पर घी या तेल छलक सकता है। छोटा सुविधाजनक पात्र इस्तेमाल करें और लौ के ऊपर तरल न डालें। दीपक को किनारे तक भरना भी ठीक नहीं है।

भरते समय कपड़े और बाल लौ से दूर रखें। घी या तेल गिर जाए तो उसे सुरक्षित स्थिति में साफ करें। गर्म दीपक को उठाकर सफाई करने की कोशिश न करें।

यदि पात्र अस्थिर है या रिसाव हो रहा है, तो समस्या को नजरअंदाज करके ज्योति जारी रखना उचित नहीं है।

ज्योति बुझ जाए तो घबराएं नहीं

दीपक बुझने पर कई लोग तुरंत इसे किसी बुरी घटना से जोड़ लेते हैं। पहले साधारण कारण देखेंक्या घी या तेल समाप्त हुआ, हवा लगी, बाती खिसकी या पात्र में समस्या आई?

केवल ज्योति बुझने से अनिष्ट का निष्कर्ष नहीं निकलता। घबराकर नए व्रत, कठिन प्रायश्चित या खर्च वाले अनुष्ठान तय न करें।

पहले आसपास की स्थिति सुरक्षित करें। फिर दोबारा प्रज्वलित करने और अपने संकल्प के बारे में परिवार की विधि जानने वाले पंडित से पूछें।

दीपक में आग असामान्य रूप से बढ़ रही हो या आसपास फैलने का खतरा हो तो सुरक्षा को प्राथमिकता दें। घी या तेल की आग पर पानी न डालें; सुरक्षित अग्निशमन व्यवस्था इस्तेमाल करें और जरूरत होने पर आपात सहायता लें।

क्या अखंड ज्योति के बिना पूजा अधूरी है?

हर घर की नवरात्रि पूजा में अखंड ज्योति अनिवार्य नहीं होती। अनेक परिवार दैनिक दीपक, देवी का स्मरण, पाठ, भोग और आरती के साथ उपासना करते हैं।

घर में सुरक्षित और निरंतर देखभाल संभव नहीं है तो दूसरों को देखकर संकल्प लेने का दबाव न बनाएं। अपनी परिस्थिति बताकर पारिवारिक विधि के अनुसार पूजा का विकल्प समझें।

पहले से विशेष संकल्प लिया हुआ है तो उसे बदलने या समापन करने का धार्मिक क्रम अलग से पूछें।

आखिरी दिन की तैयारी भी शुरुआत में करें

अखंड ज्योति रखने वाले परिवार कभी-कभी पूरी तैयारी पहले दिन की कर लेते हैं, लेकिन समापन का प्रश्न बाद में उठता है।

अंतिम पूजा का समय, हवन या कन्या पूजन का क्रम और ज्योति का समापन पहले स्पष्ट करें। सभी परिवारों में ये अनुष्ठान एक ही तरीके से नहीं होते।

संकल्प पूरा हो जाने के बाद भी जलता दीपक अकेला न छोड़ें। उसे संभालने या साफ करने से पहले पात्र ठंडा होने दें। गर्म दीपक को कपड़े से ढकना या उठाकर दूसरी जगह ले जाना सुरक्षित नहीं है।

अपनी नवरात्रि पूजा के प्रश्न स्पष्ट करें

श्रद्धालुओं की जरूरत केवल “दीपक कैसे जलाएं” तक सीमित नहीं होती। घर की पुरानी परंपरा, पहली बार लिया गया संकल्प और बदलती दिनचर्या के कारण व्यक्तिगत प्रश्न सामने आते हैं।

दिल्ली के शालीमार बाग स्थित Anant Gyan का नेतृत्व ज्योतिष आचार्य राममेहर शर्मा करते हैं। वैदिक ज्योतिष में उनका 30 से अधिक वर्षों का अनुभव है। नवरात्रि के संकल्प, पूजा के क्रम और समापन से जुड़े प्रश्नों पर उपलब्ध मार्गदर्शन के लिए उनसे संपर्क करें।

बातचीत से पहले अपने प्रश्न लिख लें: घर में कौन-सी विधि अपनाई जाती है, ज्योति कितने समय रखनी है और देखभाल की व्यवस्था क्या है। इससे चर्चा आपकी वास्तविक जरूरत पर केंद्रित रहेगी।

अखंड ज्योति का संकल्प लेने से पहले विधि स्पष्ट करेंAnant Gyan में आचार्य राममेहर शर्मा से मार्गदर्शन लें।

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