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शारदीय नवरात्रि 2026 कब से शुरू हैं? सही तारीख, कलश स्थापना और पूजा कैलेंडर

By October 8, 2026 Blog
शारदीय नवरात्रि 2026 का बैनर, मां दुर्गा, पूजा कलश और हाथ जोड़े आचार्य राममेहर शर्मा

शारदीय नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होंगी। इस दिन कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा के साथ देवी उपासना का आरंभ होगा। दिल्ली में कलश स्थापना का सुबह का मुहूर्त 6:19 से 10:12 बजे तक है।

इस वर्ष पूजा की तारीखों को समझना थोड़ा जरूरी है। 17 और 18 अक्टूबर को सप्तमी रहेगी, जबकि 19 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी और महानवमी के प्रमुख पूजन होंगे। 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी।

अगर आप घर पर पूजा रखने की तैयारी कर रहे हैं, तो पहले तारीख, स्थापना का समय और समापन की विधि स्पष्ट कर लें। इससे सामग्री जुटाने, व्रत की व्यवस्था करने और परिवार के साथ पूजा का समय तय करने में आसानी होगी।

नवरात्रि की शुरुआत 10 अक्टूबर से होगी या 11 अक्टूबर से?

नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होंगी। 10 अक्टूबर की तारीख इसलिए सामने आती है क्योंकि प्रतिपदा तिथि उसी रात शुरू हो रही है। लेकिन अगले दिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा रहने के कारण घटस्थापना 11 अक्टूबर को होगी।

दिल्ली के पंचांग के अनुसार:

  • प्रतिपदा तिथि का आरंभ: 10 अक्टूबर, रात 9:19 बजे।
  • प्रतिपदा तिथि का समापन: 11 अक्टूबर, रात 9:30 बजे।
  • कलश स्थापना और नवरात्रि का पहला दिन: 11 अक्टूबर, रविवार।

पंचांग की तिथि और अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख हमेशा एक साथ नहीं बदलतीं। कोई तिथि रात में शुरू होकर अगले दिन तक रह सकती है। इसी वजह से केवल तिथि शुरू होने का समय देखकर त्योहार या पूजा की तारीख तय नहीं करनी चाहिए।

घर की सफाई और सामग्री की तैयारी 10 अक्टूबर तक पूरी कर सकते हैं। कलश स्थापना 11 अक्टूबर के उपयुक्त मुहूर्त में करें।

दिल्ली में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?

कलश स्थापना को घटस्थापना भी कहते हैं। नवरात्रि के पहले दिन इसके माध्यम से देवी का आवाहन किया जाता है और पूजा का संकल्प लिया जाता है।

11 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के लिए घटस्थापना के समय:

मुहूर्तसमय
सुबह का मुहूर्तसुबह 6:19 से 10:12 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त का विकल्पसुबह 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक

ये समय दिल्ली के लिए भारतीय मानक समय के अनुसार हैं। दूसरे शहरों में सूर्योदय और स्थानीय गणना के कारण समय अलग हो सकता है। इसलिए बाहर रहने वाले पाठक अपने शहर का पंचांग देखें।

यदि आपके घर में स्थापना की विशेष विधि अपनाई जाती है, तो उसे पहले समझ लें। पूजा के समय सामग्री ढूंढने या विधि पूछने के बजाय तैयारी पहले कर लेना अधिक सुविधाजनक रहेगा।

नवरात्रि 2026 का पूजा कैलेंडर

इस बार देवी पूजन का क्रम तय करते समय तारीख के साथ तिथि भी देखें। खास तौर पर 18 अक्टूबर को आठवां दिन होने के बावजूद सप्तमी रहेगी। इसलिए उस दिन को अपने आप अष्टमी मान लेना सही नहीं होगा।

तारीखदिनप्रमुख पूजा
11 अक्टूबररविवारकलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा
12 अक्टूबरसोमवारमां ब्रह्मचारिणी की पूजा
13 अक्टूबरमंगलवारमां चंद्रघंटा की पूजा
14 अक्टूबरबुधवारमां कूष्मांडा की पूजा
15 अक्टूबरगुरुवारमां स्कंदमाता की पूजा
16 अक्टूबरशुक्रवारमां कात्यायनी की पूजा
17 अक्टूबरशनिवारमां कालरात्रि की पूजा
18 अक्टूबररविवारसप्तमी जारी रहेगी; नियमित देवी उपासना
19 अक्टूबरसोमवारदुर्गा अष्टमी, मां महागौरी की पूजा और महानवमी के अनुष्ठान
20 अक्टूबरमंगलवारनवमी होम, पारण, दुर्गा विसर्जन और विजयादशमी

कैलेंडर से आप पूरे पर्व की योजना बना सकते हैं। हालांकि कन्या पूजन, हवन और व्रत खोलने के लिए संबंधित तिथि का समय भी समझना जरूरी है।

अष्टमी और नवमी की पूजा एक ही तारीख को कैसे होगी?

हिंदू पंचांग की तिथियां निश्चित 24 घंटे की नहीं होतीं। कभी कोई तिथि दो सूर्योदय तक रहती है और कभी एक ही अंग्रेजी तारीख के भीतर तिथि बदल जाती है।

इस वर्ष दिल्ली के पूजा कैलेंडर में 19 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी और महानवमी दोनों के प्रमुख पूजन दिए गए हैं। इसका मतलब यह नहीं कि दोनों तिथियां पूरे दिन एक साथ रहेंगी। अष्टमी का अनुष्ठान अष्टमी के उपयुक्त समय में और नवमी का अनुष्ठान नवमी के अनुसार किया जाएगा।

इसी तरह 20 अक्टूबर के कैलेंडर में नवमी होम और पारण भी शामिल हैं। इसलिए पूजा समापन की योजना केवल “नवमी की तारीख” देखकर न बनाएं। अपने अनुष्ठान और पारिवारिक परंपरा के अनुसार समय की पुष्टि करें।

कन्या पूजन अष्टमी पर करें या नवमी पर?

कई परिवारों में कन्या पूजन अष्टमी को होता है, जबकि कुछ घरों में नवमी की परंपरा है। अपने घर में चली आ रही परंपरा के अनुसार पूजा की योजना रखें।

इस साल तारीखों की स्थिति अलग होने के कारण कन्या पूजन का समय पहले तय करना उपयोगी होगा। यदि कोई संशय है, तो पूजा से एक-दो दिन पहले ही पंडित से पूछ लें।

कन्या पूजन की तैयारी में केवल भोजन और उपहार शामिल नहीं हैं। बच्चों तथा उनके अभिभावकों की सुविधा का भी ध्यान रखें:

  • आने का समय पहले बता दें।
  • भोजन स्वच्छता से तैयार करें।
  • किसी बच्चे को खाद्य पदार्थ से एलर्जी हो तो विकल्प रखें।
  • बैठने और हाथ धोने की उचित व्यवस्था करें।
  • बच्चों को बिना जल्दबाजी के सम्मानपूर्वक भोजन कराएं।

इस तरह पूजा की तैयारी अधिक व्यवस्थित और सहज रहेगी।

पूजा शुरू होने से पहले क्या तैयार कर लें?

सबसे पहले पूजा के लिए साफ और सुविधाजनक स्थान चुनें। ऐसी जगह रखें जहां परिवार आराम से बैठ सके और दीपक सुरक्षित रहे।

सामान्य सामग्री में देवी की तस्वीर या प्रतिमा, चौकी, स्वच्छ वस्त्र, कलश, जल, नारियल, पुष्प, रोली, अक्षत, मौली, दीपक और भोग की सामग्री रख सकते हैं। पत्तों तथा अन्य वस्तुओं का चुनाव अपनी परंपरा के अनुसार करें। जौ बोने की परंपरा हो तो पात्र, मिट्टी और जौ भी तैयार रखें।

हर घर की सामग्री सूची बिल्कुल समान होना जरूरी नहीं है। विशेष पूजा या अनुष्ठान करवा रहे हैं तो आवश्यक सामान की सूची पहले ले लें।

साथ ही यह तय करें कि रोज पूजा कौन करेगा, भोग कौन तैयार करेगा और पाठ के लिए कितना समय रखा जाएगा। छोटी-छोटी जिम्मेदारियां पहले बांटने से नौ दिनों की व्यवस्था संभालना आसान होता है।

घर पर नौ दिनों की पूजा कैसे व्यवस्थित रखें?

दैनिक पूजा का ऐसा समय चुनें जिसे परिवार नियमित रूप से निभा सके। सुबह पूजा स्थल साफ करें, देवी का स्मरण करें और अपनी परंपरा के अनुसार पुष्प, भोग तथा आरती अर्पित करें।

यदि दुर्गा सप्तशती का पाठ या कोई विशेष मंत्र-जप करने का संकल्प लेना चाहते हैं, तो उसका क्रम पहले समझ लें। पहली बार पूजा करते समय अपनी उपलब्धता जाने बिना बहुत विस्तृत अनुष्ठान का संकल्प लेना कठिन हो सकता है।

भोग में स्वच्छता और परिवार की परंपरा का ध्यान रखें। हर दिन महंगा या जटिल पकवान बनाना आवश्यक नहीं है।

अखंड ज्योति रखने पर उसकी सुरक्षित देखभाल की व्यवस्था करें। दीपक को पर्दों, कागज और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें। घर की परिस्थितियों को देखकर ही यह संकल्प लें।

नवरात्रि का समापन और व्रत का पारण कब होगा?

इस वर्ष दिल्ली के कैलेंडर में 20 अक्टूबर को नवरात्रि पारण, दुर्गा विसर्जन और विजयादशमी दिए गए हैं। लेकिन हर परिवार का व्रत-संकल्प और समापन का तरीका एक जैसा नहीं होता।

कुछ लोग पूरे पर्व का व्रत रखते हैं, जबकि कुछ केवल चुनिंदा दिनों में उपवास करते हैं। इसलिए अपने संकल्प के अनुसार पारण का समय समझें। हवन या विशेष अनुष्ठान हो तो उसकी व्यवस्था भी पहले कर लें।

व्रत के दौरान अपनी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और नियमित दवाओं की अनदेखी न करें।

पूजा को लेकर कोई प्रश्न हो तो व्यक्तिगत मार्गदर्शन लें

सही कैलेंडर मिलने के बाद भी पहली बार पूजा करने वाले परिवारों के मन में प्रश्न रह सकते हैं—कलश में क्या रखना है, संकल्प कैसे लेना है या घर की पुरानी परंपरा के अनुसार पूजा कैसे करनी है।

दिल्ली के शालीमार बाग स्थित Anant Gyan में ज्योतिष आचार्य राममेहर शर्मा से मार्गदर्शन के लिए संपर्क कर सकते हैं। वैदिक ज्योतिष में उनका 30 से अधिक वर्षों का अनुभव है।

बात करने से पहले अपने प्रश्न लिख लें और बताएं कि आप स्वयं घर पर पूजा करेंगे या किसी विशेष अनुष्ठान के लिए सहायता चाहते हैं। उपलब्ध मार्गदर्शन, समय और शुल्क की जानकारी पहले स्पष्ट कर लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. शारदीय नवरात्रि 2026 कब से शुरू हैं?

शारदीय नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होंगी। इसी दिन कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा होगी।

2. दिल्ली में कलश स्थापना किस समय करें?

सुबह का मुहूर्त 6:19 से 10:12 बजे तक है। अभिजीत मुहूर्त का विकल्प 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक है।

3. क्या 18 अक्टूबर को अष्टमी की पूजा होगी?

दिल्ली के इस वर्ष के कैलेंडर में 18 अक्टूबर को सप्तमी रहेगी। दुर्गा अष्टमी का प्रमुख पूजन 19 अक्टूबर को है।

4. अष्टमी और महानवमी एक ही तारीख को हैं तो कन्या पूजन कब करें?

अपने परिवार की अष्टमी या नवमी की परंपरा के अनुसार संबंधित तिथि का समय देखकर कन्या पूजन करें। दोनों के प्रमुख पूजन 19 अक्टूबर को होने का अर्थ पूरे दिन एक जैसी तिथि होना नहीं है।

5. क्या दिल्ली का मुहूर्त दूसरे शहरों में भी इस्तेमाल कर सकते हैं?

अपने शहर का मुहूर्त देखना बेहतर है। सूर्योदय और स्थानीय पंचांग की गणना के अनुसार घटस्थापना का समय बदल सकता है।

कलश स्थापना का सही समय और विधि जानने के लिए दिल्ली में ज्योतिष आचार्य राममेहर शर्मा (Astrologer in Delhi) से संपर्क करें।

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